उपनयन संस्कार की थिक
उपनयन, जकरा जनेऊ संस्कार सेहो कहल जाइत अछि, षोडश संस्कार में सँ एक अछि जाहि में बालक के यज्ञोपवीत धारण करा गायत्री मंत्रक दीक्षा देल जाइत अछि - ई शिक्षा-आरंभक प्रतीकात्मक द्वितीय जन्म मानल जाइत अछि। मिथिला परंपरा में उपनयन संस्कार मरवा नामक विशेष सजाओल बाँसक मंडप पर संपन्न होइत अछि, जे आंगनक बीचोबीच बनाओल जाइत अछि - ठीक जेना विवाहक मंडप।
आगामी उपनयन मुहूर्त
मुहूर्त केना गणना कएल जाइत अछि
ShivMarg के मुहूर्त गणना जीन मीयस (Jean Meeus) के खगोलीय एल्गोरिदम आ लाहिड़ी अयनांश पर आधारित अछि, दरभंगा-मधुबनी के भौगोलिक निर्देशांक के हिसाबसँ। पूरा गणना विधि आ दैनिक पंचांग देखबाक लेल हमर मैथिली पंचांग कैलेंडर पन्ना देखू।
उपनयनक समय ध्यान रखबा जोग बात
- बालकक जन्म नक्षत्रक दिन आ जन्म मास में उपनयन नहि करबाक परामर्श देल जाइत अछि।
- श्राद्ध पक्ष आ पंचक काल में उपनयन वर्जित मानल जाइत अछि।
- राहु काल आ यमगण्ड काल में शुभ कार्य नहि करी।
- सामान्यतः 5, 7 या 9 वर्षक उमर उपनयन लेल उपयुक्त मानल जाइत अछि।
- शुक्ल पक्ष के तिथि प्राथमिकता देल जाइत अछि।
अक्सर पूछल जाए वाला सवाल
उपनयन संस्कार की अछि?
उपनयन (जनेऊ संस्कार) षोडश संस्कार में सँ एक अछि, जाहि में बालक के यज्ञोपवीत धारण करा गायत्री मंत्रक दीक्षा देल जाइत अछि।
उपनयन कोन उमर में कएल जाइत अछि?
सामान्यतः 5, 7 या 9 वर्षक उमर में, कुल परंपरा आ बालकक जन्म नक्षत्रक अनुसार भिन्नता रहि सकैत अछि।
मैथिल उपनयन में मरवा के की महत्व अछि?
मरवा एक सजाओल बाँसक मंडप थिक जे मिथिला परंपरा में उपनयन आ विवाह दुनू संस्कार लेल आंगन में बनाओल जाइत अछि।
उपनयनक समय कोन बात के ध्यान राखी?
बालकक जन्म नक्षत्रक दिन, श्राद्ध पक्ष, पंचक आ राहु काल में उपनयन नहि करी।
मुहूर्त लिस्ट के कैलेंडर में कोना सेव करी?
हर कार्ड पर देल कैलेंडर आइकन सँ सीधा Google Calendar में जोड़ू, या ICS फाइल डाउनलोड कऽ के इम्पोर्ट करू।