रुसि चलली गौरी तेजि महेश

Rusi Chalali Gauri Teji Mahesh — मैथिली • विद्यापति

विद्यापति रचित मैथिली गीत।

✦ विद्यापति महेशवाणी · मैथिली शिव गीत ✦

रुसि चलली गौरी तेजि महेश — गीत का परिचय

“रुसि चलली गौरी तेजि महेश” महाकवि विद्यापति से संबद्ध प्रसिद्ध मैथिली महेशवाणी पद है। उपलब्ध ऑनलाइन स्रोत इसे शिव-भक्ति की उस परंपरा में रखते हैं जिसमें गौरी और महेश के पारिवारिक संवाद को सरल, लोक-गायन योग्य मैथिली भाषा में व्यक्त किया जाता है।

मुखड़ा: “रुसि चलली गौरी तेजि महेश”
इस छोटे अंश का उपयोग गीत की पहचान के लिए किया गया है; नीचे उसका प्रसंग और भावार्थ विस्तार से समझाया गया है।

गीत का प्रसंग

गीत का केंद्र गौरी का रूठकर अपने नैहर जाने का प्रसंग है। उपलब्ध पाठों में महेश गौरी को रोकने का आग्रह करते हैं, जबकि गौरी अपने नैहर जाने की बात पर दृढ़ रहती हैं। संवाद में शिव के तपस्वी जीवन, त्रिशूल और बाघम्बर जैसे प्रतीकों तथा गौरी के पारिवारिक पक्ष का उल्लेख आता है। अंत में कवि नीलकंठ शिव से गौरी के क्लेश हरने की प्रार्थना करते हैं।

भावार्थ — सरल हिंदी में

गौरी किसी बात से रुष्ट होकर महेश को छोड़कर अपने मायके जाने लगती हैं। महेश उन्हें समझाते हैं कि नैहर न जाएँ और अपने साथ के साधु-सामग्री को बेचकर भी जीवन चलाने की बात कहते हैं। गौरी अपने निर्णय पर कायम रहती हैं। इस घरेलू संवाद के माध्यम से विद्यापति शिव-पार्वती के संबंध में रूठना, मनाना, स्नेह और हास्य का लोक-सुलभ रूप सामने लाते हैं।

महेशवाणी क्या है?

महेशवाणी मैथिली की उस भक्तिपरक काव्य-परंपरा से जुड़ा नाम है जिसमें महेश अर्थात शिव को केंद्र में रखकर गीत रचे और गाए जाते हैं। विद्यापति की शिव-भक्ति पदावली में देवता और परिवार के बीच मानवीय संवाद का विशेष आकर्षण दिखाई देता है। इसी कारण ऐसे पद केवल स्तुति नहीं लगते, बल्कि उनमें घरेलू जीवन, भावनाएँ और लोकभाषा भी साथ आती हैं।

इस गीत की खास बातें

रचना-स्रोत संबंधी सूचना: इस पृष्ठ पर विद्यापति के नाम से प्रचलित गीत का परिचय और भावार्थ दिया जा रहा है। ऑनलाइन उपलब्ध पाठों में शब्दों और वर्तनी के छोटे-छोटे पाठांतर मिलते हैं, इसलिए अलग गायन/पुस्तक में पंक्तियों का रूप थोड़ा भिन्न हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

“रुसि चलली गौरी तेजि महेश” किसका गीत है?

उपलब्ध स्रोत इसे महाकवि विद्यापति का मैथिली महेशवाणी/शिव-भक्ति पद बताते हैं।

गीत में गौरी क्यों रूठती हैं?

उपलब्ध पाठों में गौरी के रूठकर नैहर जाने का संवाद मुख्य प्रसंग है; गीत इसका विस्तृत कारण आधुनिक कथा की तरह निश्चित रूप से नहीं बताता।

यह गीत किस भाषा में है?

इसका मूल पाठ मैथिली में है और यह मिथिला की शिव-भक्ति गीत परंपरा से जुड़ा है।

महेशवाणी का अर्थ क्या है?

महेशवाणी नाम शिव यानी महेश को केंद्र में रखने वाली मैथिली भक्तिपरक गीत-परंपरा के लिए प्रचलित है।

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