अनंत पूजा 2026: मिथिलांचल में 25 सितंबर को प्रातः 10:52 बजे पूजा, जानें विधि, अनंत सूत्र और महत्व

अनंत पूजा 2026 शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। मिथिलांचल की परंपरा में यह दिन विशेष रूप से भगवान अनंत की पूजा, अनंत सूत्र धारण करने और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए संकल्प लेने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार मिथिलांचल में अनंत पूजा का प्रमुख समय प्रातः 10:52 बजे है।

अनंत पूजा भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को की जाती है। इसी तिथि को देश के अनेक भागों में अनंत चतुर्दशी या अनंत चौदस कहा जाता है। 2026 में इसी दिन गणेशोत्सव के समापन के अवसर पर गणेश विसर्जन भी किया जाएगा।

मिथिला में अनंत पूजा की परंपरा केवल एक सामान्य व्रत या पर्व तक सीमित नहीं है। यहां 14 ग्रंथियों वाले अनंत सूत्र की पूजा और उसे धारण करने की परंपरा इस पर्व का प्रमुख हिस्सा है। इसलिए मिथिलांचल में रहने वाले परिवारों के लिए इस दिन का अपना विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है।

अनंत पूजा 2026 कब है?

वर्ष 2026 में अनंत पूजा और अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को है। यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है।

  • पर्व: अनंत पूजा / अनंत चतुर्दशी
  • तिथि: 25 सितंबर 2026
  • दिन: शुक्रवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • मास: भाद्रपद
  • तिथि: चतुर्दशी
  • मिथिलांचल में प्रमुख पूजा समय: प्रातः 10:52 बजे

ध्यान दें: पूजा का समय स्थान और संबंधित पंचांग की गणना के अनुसार अलग हो सकता है। ऊपर दिया गया 10:52 बजे का समय विशेष रूप से मिथिलांचल के लिए रखा गया है। दूसरे शहरों में रहने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना चाहिए।

मिथिलांचल में अनंत पूजा का क्या महत्व है?

मिथिला क्षेत्र में अनंत पूजा की एक पुरानी पारिवारिक और सामुदायिक परंपरा रही है। पूजा के दौरान भगवान अनंत की आराधना की जाती है और चौदह ग्रंथियों वाले सूत्र को विधिपूर्वक पूजित करके धारण किया जाता है। स्थानीय परंपराओं में इस सूत्र को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से जोड़ा जाता है।

अनंत का अर्थ है जिसका कोई अंत नहीं। इसलिए इस पूजा में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का स्मरण करते हुए परिवार की स्थिरता, सुख, शांति और मंगल की कामना की जाती है।

मिथिला की स्थानीय परंपरा में पूजा के बाद परिवार के सदस्यों द्वारा अनंत सूत्र धारण करना इस पर्व का विशेष आकर्षण है। दरभंगा और मधुबनी क्षेत्र की स्थानीय रिपोर्टिंग में भी 14 ग्रंथियों वाले अनंत सूत्र और सामूहिक अनंत पूजा की परंपरा का उल्लेख मिलता है।

अनंत सूत्र क्या होता है?

अनंत सूत्र अनंत पूजा का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। सामान्यतः इसे धागे से तैयार किया जाता है और इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। पूजा से पहले इस सूत्र को भगवान अनंत के समक्ष रखकर विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

धार्मिक परंपरा में इन 14 गांठों को चौदह लोकों के प्रतीक के रूप में समझा जाता है। इसका उद्देश्य केवल धागा पहनना नहीं, बल्कि भगवान के अनंत स्वरूप के प्रति श्रद्धा और अपने संकल्प को स्मरण रखना है।

मिथिला की परंपरा में अनंत सूत्र को विशेष महत्व दिया जाता है और पूजा के बाद इसे परिवार के सदस्य धारण करते हैं।

अनंत सूत्र किस हाथ में बांधा जाता है?

परंपरागत रूप से अनंत सूत्र धारण करने के संबंध में यह मान्यता प्रचलित है कि:

  • पुरुष दाहिने हाथ में अनंत सूत्र धारण करते हैं।
  • महिलाएं बाएं हाथ में अनंत सूत्र धारण करती हैं।

हालांकि परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार इसके पालन में अंतर मिल सकता है। इसलिए अपने परिवार में चली आ रही परंपरा और स्थानीय आचार का सम्मान करना उचित है।

अनंत पूजा 2026 की पूजा सामग्री

घर पर अनंत पूजा करने से पहले आवश्यक पूजन सामग्री व्यवस्थित कर लेना उपयोगी रहता है। सामान्य रूप से निम्न सामग्री रखी जा सकती है:

  • भगवान विष्णु या अनंत भगवान की तस्वीर अथवा प्रतिमा
  • अनंत सूत्र
  • पूजा की चौकी
  • स्वच्छ वस्त्र
  • कलश
  • जल
  • अक्षत
  • रोली या कुमकुम
  • हल्दी
  • चंदन
  • पुष्प
  • तुलसी दल
  • धूप और दीप
  • नैवेद्य
  • फल
  • प्रसाद
  • पूजा के लिए आवश्यक अन्य स्थानीय सामग्री

पूजा सामग्री की सूची परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार कुछ अलग हो सकती है। सभी सामग्री उपलब्ध न होने पर पूजा की भावना और श्रद्धा को प्राथमिकता देना चाहिए।

अनंत पूजा की सरल विधि

1. पूजा स्थान की तैयारी

सुबह स्नान करके पूजा स्थान की सफाई करें। पूजा की चौकी को स्वच्छ वस्त्र से ढकें और भगवान विष्णु अथवा अनंत भगवान की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

2. संकल्प लें

भगवान का ध्यान करके परिवार के मंगल और अपनी श्रद्धा के अनुसार अनंत पूजा का संकल्प लें। संकल्प में तिथि, स्थान और अपनी पूजा का उद्देश्य स्मरण किया जा सकता है।

3. कलश और भगवान की पूजा करें

कलश स्थापित करके भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का ध्यान करें। इसके बाद जल, अक्षत, चंदन, पुष्प, तुलसी, धूप, दीप और नैवेद्य आदि अर्पित करें।

4. अनंत सूत्र को पूजा में रखें

14 गांठ वाले अनंत सूत्र को भगवान के सामने रखें। उसे श्रद्धापूर्वक पूजा में शामिल करें और भगवान अनंत का ध्यान करते हुए पुष्प तथा अक्षत अर्पित करें।

5. अनंत व्रत कथा सुनें

पूजा के दौरान अनंत व्रत से संबंधित कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है। कथा का उद्देश्य भगवान अनंत के प्रति श्रद्धा और व्रत के संकल्प को स्मरण करना है।

6. आरती और प्रार्थना करें

पूजा पूरी होने के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि तथा मंगल के लिए प्रार्थना करें।

7. अनंत सूत्र धारण करें

पूजा पूर्ण होने के बाद परिवार के सदस्य अपनी परंपरा के अनुसार अनंत सूत्र धारण करें। सूत्र को केवल धार्मिक प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि भगवान के प्रति अपने संकल्प और श्रद्धा के स्मरण के रूप में धारण करना चाहिए।

अनंत पूजा में 14 गांठों का क्या महत्व है?

अनंत सूत्र की चौदह गांठें इस पर्व की सबसे विशिष्ट पहचान हैं। धार्मिक परंपरा में इन्हें चौदह लोकों से जोड़ा जाता है। इस प्रकार सूत्र का प्रत्येक गांठ वाला भाग ब्रह्मांड की व्यापकता और भगवान के अनंत स्वरूप की याद दिलाता है।

मिथिला में इन गांठों वाले सूत्र की पूजा की परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसलिए अनंत पूजा के दिन केवल सूत्र बांधना ही नहीं, बल्कि पहले उसे भगवान के समक्ष श्रद्धापूर्वक स्थापित और पूजित करना भी परंपरा का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।

अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा

अनंत चतुर्दशी से जुड़ी पौराणिक परंपरा में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना का वर्णन मिलता है। इस पर्व से जुड़ी कथा में कौण्डिल्य ऋषि और उनकी पत्नी सुशीला का प्रसंग भी प्रसिद्ध है। कथा का मुख्य संदेश श्रद्धा, संकल्प और भगवान अनंत की उपासना से जुड़ा हुआ है।

एक अन्य प्रसिद्ध परंपरा में महाभारत से जुड़े प्रसंग के माध्यम से अनंत व्रत की महिमा बताई जाती है। इन कथाओं का उद्देश्य भक्त को व्रत के धार्मिक और आध्यात्मिक भाव से जोड़ना है।

अनंत पूजा का मूल भाव केवल किसी भौतिक लाभ की इच्छा करना नहीं, बल्कि भगवान के अनंत स्वरूप का स्मरण, श्रद्धा और अपने संकल्प के प्रति निष्ठा रखना है।

अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का क्या संबंध है?

अनंत चतुर्दशी का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इसी दिन अनेक स्थानों पर गणेशोत्सव का समापन होता है। 2026 में भी 25 सितंबर को गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी एक ही दिन पड़ रहे हैं।

गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है और दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ किया जाता है। इस कारण 25 सितंबर को धार्मिक दृष्टि से दो प्रमुख परंपराएं एक साथ दिखाई देंगी—भगवान गणेश की विदाई और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा।

25 सितंबर के बाद कौन-सा धार्मिक पर्व आएगा?

अनंत चतुर्दशी के अगले दिन 26 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा है। इसके बाद 27 सितंबर 2026 से पितृपक्ष का आरंभ होता है। इसलिए सितंबर के अंतिम सप्ताह में धार्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण संक्रमण दिखाई देता है—अनंत पूजा और गणेश विसर्जन के बाद पूर्णिमा तथा फिर पितृपक्ष का आरंभ।

जो परिवार पितृपक्ष के श्राद्ध और तर्पण की परंपरा का पालन करते हैं, उन्हें अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार आगे की तिथियां और श्राद्ध संबंधी नियम अवश्य देख लेने चाहिए।

क्या अनंत पूजा में व्रत रखना जरूरी है?

अनंत चतुर्दशी पर व्रत रखने की परंपरा है, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, आयु और पारिवारिक परंपरा अलग होती है। इसलिए व्रत का पालन अपनी क्षमता और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार करना उचित है।

यदि कोई व्यक्ति पूर्ण उपवास करने में सक्षम नहीं है, तो वह श्रद्धापूर्वक पूजा, भगवान का स्मरण, कथा श्रवण और सात्त्विक आहार के माध्यम से भी पर्व का पालन कर सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास से बचना चाहिए।

मिथिलांचल में अनंत पूजा क्यों विशेष है?

मिथिला की धार्मिक संस्कृति में पंचांग, परिवार और स्थानीय परंपराओं का गहरा संबंध है। यहां कई पर्वों का पालन केवल तिथि के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय पंचांग और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के अनुसार किया जाता है।

अनंत पूजा इसका एक अच्छा उदाहरण है। 2026 के लिए दरभंगा पंडित सभा द्वारा जारी पर्व-त्योहार संबंधी निर्णयों में भी 25 सितंबर को अनंत पूजा निर्धारित की गई है। मिथिला क्षेत्र में अनंत सूत्र की 14 ग्रंथियों की पूजा और उसके बाद धारण करने की परंपरा इस पर्व को स्थानीय सांस्कृतिक पहचान से जोड़ती है।

अनंत पूजा 2026: एक नजर में

विवरण जानकारी
पर्व अनंत पूजा / अनंत चतुर्दशी
तारीख 25 सितंबर 2026
दिन शुक्रवार
हिंदू तिथि भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी
मिथिलांचल में प्रमुख पूजा समय प्रातः 10:52 बजे
मुख्य आराध्य भगवान विष्णु का अनंत स्वरूप
मुख्य प्रतीक 14 ग्रंथियों वाला अनंत सूत्र
विशेष अवसर गणेश विसर्जन
अगला प्रमुख चरण 26 सितंबर भाद्रपद पूर्णिमा, 27 सितंबर से पितृपक्ष

अनंत पूजा 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

अनंत पूजा 2026 कब है?

अनंत पूजा 2026 में शुक्रवार, 25 सितंबर को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है।

मिथिलांचल में अनंत पूजा का समय क्या है?

मिथिलांचल के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार अनंत पूजा का प्रमुख समय 25 सितंबर 2026 को प्रातः 10:52 बजे है। अन्य शहरों के श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखें।

अनंत सूत्र में कितनी गांठें होती हैं?

परंपरा के अनुसार अनंत सूत्र में 14 गांठें होती हैं। इन्हें धार्मिक रूप से चौदह लोकों से जोड़ा जाता है।

अनंत सूत्र किस हाथ में बांधा जाता है?

परंपरागत रूप से पुरुष दाहिने और महिलाएं बाएं हाथ में अनंत सूत्र धारण करती हैं। परिवार या क्षेत्र की स्थानीय परंपरा अलग हो तो उसका पालन किया जा सकता है।

क्या अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन भी होता है?

हां। 2026 में गणेश विसर्जन की प्रमुख तिथि भी 25 सितंबर है, जो अनंत चतुर्दशी के दिन पड़ रही है।

क्या अनंत पूजा केवल मिथिलांचल में होती है?

नहीं। अनंत चतुर्दशी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के रूप में मनाई जाती है। मिथिलांचल में इसकी अपनी विशिष्ट पारिवारिक और स्थानीय परंपराएं हैं।

अनंत पूजा के बाद कौन-सा पर्व आता है?

26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है और 27 सितंबर 2026 से पितृपक्ष आरंभ होता है।

निष्कर्ष

अनंत पूजा 2026 मिथिलांचल के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाने वाली इस पूजा में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का स्मरण किया जाता है और 14 ग्रंथियों वाले अनंत सूत्र की पूजा एवं धारण की परंपरा निभाई जाती है।

मिथिलांचल में स्थानीय पंचांग के अनुसार प्रातः 10:52 बजे पूजा का प्रमुख समय रखा गया है। साथ ही इसी दिन गणेश विसर्जन होने के कारण 25 सितंबर धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

इस दिन पूजा करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात केवल सामग्री या विधि नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल्प और अपनी पारिवारिक परंपरा का सम्मान है। यदि आप मिथिलांचल से बाहर रहते हैं, तो अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय अवश्य मिलाएं।

शुभ अनंत चतुर्दशी। भगवान अनंत सभी के जीवन में सुख, शांति और मंगल प्रदान करें।