पूर्णिमा का चाँद हमारे लिए उजाले का सबसे भरोसेमंद प्रतीक है। फिर भी कुछ रातों में वही चाँद धीरे-धीरे छाया में उतरता है और ताँबे जैसा लाल हो जाता है। 2026 में ऐसी दो रातें आईं: 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण और 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण। अब सवाल यह है कि अगला चंद्र ग्रहण कब दिखेगा, भारत से दिखेगा या नहीं, और सूतक कब मान्य होगा। यह लेख इन्हीं सवालों के साथ ग्रहण को विज्ञान, पुराण और परंपरा, तीनों नज़रों से समझने की कोशिश है।
2026 में भारत ने क्या देखा
3 मार्च 2026 का पूर्ण चंद्र ग्रहण अमेरिका, यूरोप और एशिया-प्रशांत के बड़े हिस्से में दिखा। भारत में उस दिन चंद्रोदय शाम को हुआ, इसलिए यहाँ ग्रहण के अंतिम चरण ही दिखे, और सबसे पहले पूर्वी हिस्सों में। 28 अगस्त 2026 का आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिन के समय पड़ा, इसलिए यहाँ से दिखाई नहीं दिया और उसका सूतक भी मान्य नहीं माना गया।
चंद्र ग्रहण होता कैसे है
चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात को होता है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह छाया दो हिस्सों की होती है: भीतर की गहरी छाया (प्रच्छाया) और बाहर की हल्की छाया (उपच्छाया)।
- पूर्ण ग्रहण: पूरा चंद्रमा गहरी छाया में चला जाता है।
- आंशिक ग्रहण: चंद्रमा का केवल एक हिस्सा गहरी छाया में आता है।
- उपच्छाया ग्रहण: चंद्रमा केवल हल्की छाया से गुज़रता है, और फ़र्क़ आँख से मुश्किल से पकड़ में आता है।
फिर हर पूर्णिमा पर ग्रहण क्यों नहीं लगता? क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग पाँच अंश झुकी है। ज़्यादातर पूर्णिमाओं पर चंद्रमा छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है।
पूर्ण ग्रहण में चाँद पूरी तरह काला नहीं होता, लाल-ताँबई दिखता है। कारण यह है कि पृथ्वी के वायुमंडल से गुज़रती सूर्य की किरणों में लाल रंग सबसे कम बिखरता है और मुड़कर चंद्रमा तक पहुँच जाता है। यानी चाँद पर पड़ती लाली दरअसल पृथ्वी के सारे सूर्योदयों और सूर्यास्तों की मिली-जुली रोशनी है।
इस समझ की जड़ें हमारे यहाँ भी गहरी हैं। पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) से जुड़े आर्यभट ने आर्यभटीय में लिखा कि चंद्र ग्रहण पृथ्वी की छाया के चंद्रमा पर पड़ने से होता है। यह बात उस दौर में कही गई जब पंचांग-गणना पहले से ग्रहणों की भविष्यवाणी कर रही थी।
पुराण की कथा: राहु और केतु
पुराणों में ग्रहण की कथा समुद्र-मंथन से जुड़ती है। अमृत बँट रहा था, तब स्वर्भानु नाम का दैत्य रूप बदलकर देवताओं की पंक्ति में बैठ गया। सूर्य और चंद्र ने उसे पहचानकर भगवान विष्णु को बता दिया। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया, पर तब तक अमृत की बूँदें उसके कंठ तक पहुँच चुकी थीं। सिर राहु और धड़ केतु कहलाया, और कथा कहती है कि वे समय-समय पर सूर्य और चंद्र को ग्रसते हैं।
रोचक बात यह है कि ज्योतिष और पंचांग में राहु-केतु को ग्रह की तरह गिना जाता है, पर वे चंद्रमा की कक्षा के वही दो बिंदु हैं जहाँ वह पृथ्वी-सूर्य के तल को काटती है। ग्रहण इन्हीं बिंदुओं के पास पड़ने वाली पूर्णिमा या अमावस्या पर लगते हैं। इसे कथा का प्रमाण नहीं, दो भाषाओं में कही गई एक ही बात की तरह पढ़ा जा सकता है।
सूतक, स्नान और दान: परंपरा क्या कहती है
पारंपरिक पंचांगों में चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से लगभग नौ घंटे पहले लगता है और ग्रहण समाप्त होने (मोक्ष) पर पूरा होता है। सूतक तभी मान्य माना जाता है जब ग्रहण आपके स्थान से दिखाई दे। जब ग्रहण भारत से दिखता ही न हो, जैसे 28 अगस्त 2026 को, तब पंचांग सूतक नहीं गिनते। उपच्छाया चंद्र ग्रहण को भी परंपरा में ग्रहण नहीं माना जाता, इसलिए उसमें सूतक नहीं लगता।
सूतक में मंदिरों के कपाट बंद रखना, ग्रहण के समय मंत्र-जप और ध्यान, मोक्ष के बाद स्नान और दान की परंपरा कई परिवारों में चलती है। पर इसका स्वरूप क्षेत्र, संप्रदाय और कुल-परंपरा के अनुसार बदलता है। जो नियम एक घर में कड़े माने जाते हैं, दूसरे में उतने नहीं। अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग को ही आधार बनाएँ।
खान-पान और गर्भवती स्त्रियों से जुड़ी कई मान्यताएँ भी प्रचलित हैं। विज्ञान के पास इनके पक्ष में कोई प्रमाण नहीं है, और चंद्र ग्रहण नंगी आँखों से देखना सुरक्षित है। इसलिए जो चीज़ आस्था से जुड़ी है उसे आस्था की तरह निभाइए, पर किसी को डराइए मत। चंद्र-दर्शन की परंपरा पर हमारा यह लेख भी देखा जा सकता है: करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें।
अगला चंद्र ग्रहण कब: 2027 से 2028 तक का कैलेंडर
नीचे की तालिका NASA की गणनाओं पर आधारित है। समय भारतीय मानक समय (IST) में बदला गया है और इसमें एक-दो मिनट का अंतर संभव है। सूतक से पहले अपने स्थानीय पंचांग से मिलान कर लें।
| तारीख | प्रकार | कहाँ दिखेगा | भारत के लिए |
|---|---|---|---|
| 20-21 फ़रवरी 2027 | उपच्छाया | अमेरिका, यूरोप, अफ़्रीका, एशिया | परंपरा में ग्रहण नहीं, सूतक नहीं |
| 18 जुलाई 2027 | उपच्छाया | पूर्वी अफ़्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया | परंपरा में ग्रहण नहीं, सूतक नहीं |
| 17 अगस्त 2027 | उपच्छाया | अमेरिका, पश्चिमी अफ़्रीका | सूतक नहीं |
| 12 जनवरी 2028 | आंशिक | अमेरिका, अफ़्रीका, यूरोप, पश्चिमी एशिया | भारत में दिन (लगभग 9:43 बजे सुबह), दिखाई नहीं देगा |
| 6-7 जुलाई 2028 | आंशिक | यूरोप, अफ़्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया | रात में दिखाई देगा |
| 31 दिसंबर 2028 - 1 जनवरी 2029 | पूर्ण | यूरोप, अफ़्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत | रात में दिखाई देगा |
यानी भारत के लिए अगली सचमुच देखने लायक रातें 2028 में हैं। 2027 की तीनों घटनाएँ उपच्छाया वाली हैं, जिनमें चाँद में हल्की-सी मलिनता भर आती है।
6-7 जुलाई 2028: आंशिक ग्रहण का समय (IST)
- उपच्छाया शुरू: 6 जुलाई, रात लगभग 9:14 बजे
- आंशिक ग्रहण शुरू: रात लगभग 10:39 बजे
- ग्रहण का मध्य: रात लगभग 11:50 बजे
- आंशिक ग्रहण समाप्त: 7 जुलाई, रात लगभग 1:00 बजे
- उपच्छाया समाप्त: लगभग 2:25 बजे
इस दिन चंद्रमा के व्यास का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा गहरी छाया में जाएगा। सूतक की गणना के लिए वह 6 जुलाई को दोपहर लगभग 1:39 बजे से शुरू माना जाएगा।
31 दिसंबर 2028: साल की आख़िरी रात का पूर्ण चंद्र ग्रहण (IST)
- उपच्छाया शुरू: शाम लगभग 7:34 बजे
- आंशिक ग्रहण शुरू: रात लगभग 8:38 बजे
- पूर्णता शुरू: रात लगभग 9:46 बजे
- ग्रहण का मध्य: रात लगभग 10:22 बजे
- पूर्णता समाप्त: रात लगभग 10:58 बजे (पूर्ण ग्रहण करीब 72 मिनट का)
- आंशिक ग्रहण समाप्त: 1 जनवरी 2029, रात लगभग 12:06 बजे
- उपच्छाया समाप्त: लगभग 1:10 बजे
सूतक की गणना के लिए यह ग्रहण 31 दिसंबर की सुबह लगभग 11:38 बजे से शुरू माना जाएगा। चूँकि यह शाम-रात का ग्रहण है, इसलिए पूर्वी भारत और मिथिला की पट्टी से इसे आराम से देखा जा सकेगा।
ग्रहण देखें कैसे
चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की ज़रूरत नहीं है। खुला आसमान और क्षितिज पर बाधा रहित दृश्य काफ़ी है। छत या खुला मैदान सबसे अच्छा रहता है। दूरबीन या बाइनोक्यूलर से चंद्रमा की सतह और छाया की धार और साफ़ दिखती है। फ़ोन से तस्वीर लेनी हो तो उसे किसी स्थिर सहारे पर टिकाएँ, वरना चाँद सिर्फ़ चमकती बिंदी बनकर रह जाता है।
निष्कर्ष
ग्रहण डराने वाली घटना नहीं, पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की अपनी लय है, जिसे हमारे पूर्वजों ने कथा, गणित और व्रत, तीनों रूपों में सँजोया। आगे की तारीख़ें याद रखने लायक़ हैं: 2027 के उपच्छाया ग्रहणों में सूतक नहीं, 6-7 जुलाई 2028 का आंशिक ग्रहण रात को दिखेगा, और 31 दिसंबर 2028 को पूर्ण चंद्र ग्रहण साल को लाल चाँद के साथ विदा करेगा।
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