कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला दीपावली (दीवाली) महापर्व सनातन धर्म का सबसे भव्य, पवित्र और दीपों से जगमगाता उत्सव है। यह पर्व केवल दीप जलाने और पटाखे फोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अज्ञान पर ज्ञान, अंधकार पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की विजय का सनातन प्रतीक है। इस दिन माता लक्ष्मी (वैभव की देवी) और भगवान श्री गणेश (बुद्धि व सिद्धियों के दाता) का मुख्य पूजन किया जाता है।
दीपावली 2026: तिथि और अमावस्या का सही समय
वर्ष 2026 में कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की सही समय सारणी और निर्णय इस प्रकार है:
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2026 (रविवार) को दोपहर 02:48 बजे से
- अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026 (सोमवार) को दोपहर 12:35 बजे तक
- मुख्य दीपावली पर्व तिथि: 8 नवंबर 2026 (रविवार)। शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल और महानिशीथ काल (रात्रि व्यापिनी अमावस्या) में किया जाता है, जो कि 8 नवंबर की संध्या व रात्रि में व्याप्त है।
दीपावली 2026: लक्ष्मी-गणेश पूजन के अति-शुभ मुहूर्त
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न का समय सर्वोत्तम माना जाता है। इस समय की गई पूजा से घर-परिवार में लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है:
1. गृहस्थों के लिए प्रदोष काल लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (स्थिर वृषभ लग्न)
- पूजा का शुभ समय: 8 नवंबर 2026, शाम 05:38 बजे से रात 07:34 बजे तक
- अवधि: 1 घंटा 56 मिनट
- प्रदोष काल समय: शाम 05:32 बजे से रात 08:08 बजे तक
- वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) समय: शाम 05:38 बजे से रात 07:34 बजे तक
- विशेषता: यह मुहूर्त गृहस्थ आश्रम और व्यापारी वर्ग के लिए सबसे फलदायी और मंगलकारी माना गया है।
2. व्यापारिक प्रतिष्ठान व खाता-पूजन (चौघड़िया) मुहूर्त
- अपराह्न शुभ मुहूर्त (शुभ): दोपहर 01:25 बजे से दोपहर 02:48 बजे तक
- सायंकाल मुहूर्त (चर, लाभ): शाम 05:32 बजे से रात 08:48 बजे तक
3. तांत्रिक व साधकों के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त (सिंह लग्न)
- महानिशीथ काल समय: 8 नवंबर की मध्यरात्रि 11:39 बजे से रात 12:32 बजे तक (9 नवंबर तड़के)
- सिंह लग्न (स्थिर लग्न) समय: मध्यरात्रि 12:08 बजे से तड़के 02:24 बजे तक
- महत्व: इस मुहूर्त में महालक्ष्मी, महाकाली, श्री विद्या व मंत्र सिद्धि के लिए साधना की जाती है।
दीपावली क्यों मनाई जाती है? पौराणिक कथाएँ और ऐतिहासिक महत्व
दीपावली के पावन पर्व से केवल एक ही नहीं, बल्कि कई महान पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं:
1. भगवान श्री राम का अयोध्या आगमन
रामायण के अनुसार, चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर और लंकापति रावण का वध करके जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को देशी घी के दीपकों से सजाकर उनका भव्य स्वागत किया था। वह दिन कार्तिक अमावस्या का ही दिन था।
2. माता लक्ष्मी का क्षीरसागर से प्राकट्य
विष्णु पुराण के अनुसार, देव-दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या के दिन ही धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी क्षीरसागर (क्षीर सागर) से प्रकट हुई थीं। इसीलिए दीपावली को माता लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के रूप में पूरे भारत में पूजा जाता है।
3. राजा बलि से प्रभु वामन का त्रिपाद दान
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण करके दानवीर असुरराज बलि से तीन पग में तीनों लोक माप लिए थे और देवताओं को उनका स्वर्ग लोक पुनः लौटाया था।
4. सिख इतिहास और स्वामी दयानंद सरस्वती
सिख परंपरा में इसी दिन 1619 ईस्वी में छठे गुरु श्री गुरु हरगोविंद जी मुगल सम्राट जहांगीर की कैद से 52 राजाओं को मुक्त कराकर अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) पहुंचे थे, जिसे 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने भी इसी पावन दिन निर्वाण प्राप्त किया था।
लक्ष्मी-गणेश पूजन की संपूर्ण और प्रामाणिक विधि
दीपावली की शाम को घर के ईशान कोण या उत्तर दिशा में पूजा स्थल को स्वच्छ करके लाल या पीला वस्त्र बिछाकर चौकी सजाएं।
1. आवश्यक पूजन सामग्री
- माता लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर देव की नई मृण्मयी (मिट्टी) या धातु की मूर्ति।
- कमल गट्टा, कमल के ताजे फूल, लाल गुलाब, दूर्वा, तुलसी (केवल विष्णु/कुबेर जी हेतु), शमी पत्र।
- अक्षत (अखंडित चावल), रोली, चंदन, अबीर, गुलाल, सिंदूर, हल्दी, सुपारी, लौंग, इलायची।
- खील (धान की खील), बताशे, गुड़, मेवे, ऋतु फल, पंचामृत और शुद्ध गाय का घी।
- कलश, नारियल, आम के पत्ते, पांच पीली कौड़ियां, कमलगट्टे की माला, चांदी का सिक्का।
- 21 या 101 मिट्टी के दीपक और एक बड़ा सरसों के तेल/घी का चौमुखा दीपक।
2. चरणबद्ध पूजन प्रक्रिया
- पवित्रीकरण व आचमन: हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें—
ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः। फिर अपने और पूजन सामग्री पर जल छिड़कें—ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...। - संकल्प: हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर वर्ष 2026, तिथि (कार्तिक अमावस्या), अपने नाम और गोत्र का उच्चारण करते हुए दीपावली महालक्ष्मी पूजन का संकल्प लें।
- कलश स्थापना: चौकी के बाएं ओर कलश में जल, गंगाजल, दूर्वा, सुपारी, सिक्का डालकर उस पर आम के पल्लव और नारियल स्थापित करें।
- गणेश पूजन: सबसे पहले प्रथम पूज्य श्री गणेश जी का आह्वान करें। उन्हें वस्त्र, सिंदूर, दूर्वा, मोदक और मोली अर्पित करें।
- महालक्ष्मी पूजन: माता लक्ष्मी को रोली, कुमकुम, चंदन लगाएं। उन्हें लाल वस्त्र या चुनरी ओढ़ाएं। कमल का फूल, कमल गट्टा, खील-बताशे और मिष्ठान अर्पित करें।
- कुबेर व बही-खाता पूजन: उत्तर दिशा के स्वामी भगवान कुबेर और अपने व्यापारिक बही-खाते, तिजोरी व कलम की पूजा करें।
- दीपक प्रज्वलन: मुख्य चौमुखा दीपक पूजा की चौकी पर जलाएं। तत्पश्चात 11, 21 या 51 दीपकों में तेल/घी भरकर उन्हें पूरे घर में सजाएं।
दीपावली के सिद्ध लक्ष्मी व गणेश मंत्र
पूजा के दौरान कमलगट्टे की माला या लाल चंदन की माला से इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जप करें:
1. श्री महालक्ष्मी महामंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
2. गणेश बीज मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
3. कुबेर धन प्राप्ति मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
4. ऋण मुक्ति और दारिद्र्य नाशक मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतां दूरय दूरय स्वाहा॥
श्री महालक्ष्मी जी की आरती
पूजन के उपरांत सभी परिवारजन खड़े होकर धूप, दीप और कपूर से आरती गाएं:
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय...
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद मुनि गाता॥ ॐ जय...
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि-सिद्धि पाता॥ ॐ जय...
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय...
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय...
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय...
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ॐ जय...
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गावै।
उर आनंद समावै, पाप उतर जावै॥ ॐ जय...
दीपावली की रात किए जाने वाले अचूक सिद्ध उपाय (महा-टोटके)
दीपावली की रात्रि को 'सिद्ध रात्रि' कहा जाता है। इस रात किए जाने वाले उपाय वर्षभर धन-समृद्धि का मार्ग खोलते हैं:
- पीली कौड़ी और केसर का उपाय: पूजा के समय 11 पीली कौड़ियों को केसर और हल्दी का तिलक लगाकर लक्ष्मी जी के पास रखें। अगले दिन इन्हें लाल रेशमी कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें। कभी धन की कमी नहीं होगी।
- कमल गट्टे की माला से जप: कमलगट्टे की माला पर 108 बार महालक्ष्मी मंत्र का जाप करने से रुका हुआ धन वापस प्राप्त होता है।
- हथजोड़ी व शंख स्थापना: पूजा में दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करें और उसमें गंगाजल भरकर रखें। अगले दिन उस जल का पूरे घर में छिड़काव करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष समाप्त होता है।
- पीपल के वृक्ष के नीचे चौमुखा दीपक: दीपावली की रात 10 से 12 बजे के बीच पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाकर आएं और मुड़कर न देखें। इससे पितृ दोष और दरिद्रता का नाश होता है।
- झाड़ू का गुप्त दान: दीपावली के दिन किसी मंदिर में तीन झाड़ू का गुप्त दान करें। इससे दरिद्रता घर से सदा के लिए विदा हो जाती है।
दीपावली पर क्या करें और क्या न करें? (सावधानी नियम)
क्या करें (शुभ नियम):
- घर के मुख्य द्वार पर तोरण (आम या अशोक के पत्तों का) और सुंदर रंगोली अवश्य बनाएं।
- पूजा के बाद घर के हर अंधेरे कोने, रसोई, तुलसी के पौधे और पानी के स्थान पर दीपक अवश्य रखें।
- बड़ों का आशीर्वाद लें और गरीबों व ज़रूरतमंदों को वस्त्र, अन्न व मिठाई का दान दें।
क्या न करें (अशुभ नियम):
- दीपावली की रात घर में कलह, विवाद या किसी का अपमान न करें।
- घर के मुख्य द्वार या पूजा कक्ष के सामने गंदगी या पुराने टूटे-फूटे जूते-चप्पल न रखें।
- लक्ष्मी पूजन में तुलसी पत्र चढ़ाना वर्जित है। (तुलसी केवल विष्णु जी या गणेश/कुबेर पूजा में रखें)।
- जुआ खेलने, शराब पीने या मांसाहार का सेवन करने से बचें, इससे महालक्ष्मी रुष्ट होकर घर त्याग देती हैं।
निष्कर्ष
दीपावली का यह पावन पर्व हमें बाहरी अंधकार को मिटाने के साथ-साथ अपने भीतर के अज्ञान, द्वेष और नकारात्मकता के अंधकार को समाप्त करने की प्रेरणा देता है। शास्त्रसम्मत विधि से माता महालक्ष्मी और श्री गणेश जी का पूजन करें, अपने घर को प्रेम व दीपों के प्रकाश से भरें और समाज में सुख-समृद्धि का प्रसार करें।
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