करवा चौथ की शाम की पूजा आरती के बिना पूरी नहीं मानी जाती। कथा सुनने के बाद करवा माता की आरती की जाती है, फिर बड़ों का आशीर्वाद लेकर चंद्रोदय की प्रतीक्षा होती है। 29 अक्टूबर 2026 को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है। इस लेख में बताया गया है कि करवा माता की आरती कब और कैसे करें, आरती की थाली में क्या रखें और आरती का भाव क्या है।
करवा माता कौन हैं
करवा चौथ पर पूजी जाने वाली ‘करवा माता’ को सौभाग्य और दांपत्य की रक्षा करने वाली लोक-देवी के रूप में पूजा जाता है। ‘करवा’ शब्द का संबंध उस मिट्टी के पात्र से भी है जिसमें जल भरकर पूजा की जाती है। अनेक परिवारों में करवा माता के साथ गौरी-शंकर, गणेश जी और चंद्रदेव की भी पूजा होती है, और आरती इन्हीं सबके स्मरण के साथ की जाती है। करवा चौथ पर शिव-पार्वती से जुड़ी मान्यता के लिए मुख्य गाइड देखी जा सकती है।
आरती कब करें
- सबसे पहले शाम के मुहूर्त (5:38 से 6:56 बजे) में गणेश जी का स्मरण कर चौकी पर देवताओं और करवे की स्थापना करें।
- पूजन के बाद वीरवती या अपने परिवार की कथा सुनें। कथा यहाँ उपलब्ध है।
- कथा पूरी होने पर आरती करें।
- आरती के बाद चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें और अर्घ्य की तैयारी रखें। विधि इस लेख में है।
आरती की थाली में क्या रखें
- घी का दीपक, रुई की बाती (दीपक में कम से कम दो बातियाँ रखने की परंपरा भी है)
- रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन
- फूल या पुष्प की पंखुड़ियाँ
- मिठाई या फल, प्रसाद के लिए
- कपूर और घंटी
- सिंदूर या कुमकुम, सुहाग की सामग्री का एक अंश
आरती कैसे करें
थाली में दीपक जलाकर उसे दोनों हाथों से पकड़ें और देवताओं के सामने घड़ी की दिशा में गोल घुमाएँ। पहले चरणों की ओर, फिर नाभि, मुख और पूरे विग्रह पर घुमाने की परंपरा है। आरती के दौरान घंटी या ताली बजाई जाती है और समूह में गाई जाती है।
आरती के बाद थाली को दोनों हाथों से अपनी ओर आरती का प्रकाश लेकर माथे पर लगाएँ, फिर प्रसाद बाँटें। परिवार के सभी सदस्य आरती ले सकते हैं।
आरती का भाव क्या है
करवा माता की आरतियाँ लोक-परंपरा में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में गाई जाती हैं। सबका भाव यही रहता है कि व्रत में आई किसी भूल को माँ क्षमा करें, परिवार को सुख-सौभाग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद दें और घर में प्रेम बना रहे। जो आरती आपके परिवार में पीढ़ियों से गाई जा रही है, उसी को गाना सबसे उचित माना जाता है।
आरती के समय ध्यान रखने योग्य बातें
- आरती सामूहिक होने पर सबको एक साथ और धीमे स्वर में गाने दें, जिससे भक्ति का वातावरण बने।
- दीपक की लौ को हवा से बचाएँ, और बच्चों को थाली से थोड़ी दूरी पर रखें।
- यदि आरती कंठस्थ न हो तो किसी लिखे हुए स्रोत से पढ़कर गाना बिल्कुल ठीक है।
- आरती का समय पूजा मुहूर्त के भीतर रखने का प्रयास करें, पर परिस्थितिवश कुछ देर होना चिंता की बात नहीं मानी जाती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
करवा चौथ पर आरती किसकी की जाती है?
मुख्यतः करवा माता की, और साथ में गौरी-शंकर, गणेश जी की। कई घरों में चंद्रदेव को भी आरती दिखाई जाती है।
क्या आरती के बिना पूजा पूरी हो जाती है?
परंपरा में आरती को पूजा का समापन माना गया है। यदि किसी कारण आरती न बोल पाएँ तो श्रद्धा से मन में प्रार्थना कर दीपक दिखाना भी पर्याप्त माना जाता है।
आरती कितनी बार घुमानी चाहिए?
इसकी कोई एक सार्वभौमिक संख्या नहीं है। कई परिवारों में पहले चरणों की ओर कुछ बार, फिर मुख और पूरे विग्रह पर घुमाते हैं। अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।
निष्कर्ष
आरती करवा चौथ की शाम की पूजा का भावपूर्ण समापन है। थाली पहले से सजाकर रखें, कथा के बाद शांत मन से आरती करें और फिर चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें।
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