पिया मोर बालक - विद्यापति
पिया मोर बालक,
हम तरुणी गे।
कौन पाप करलौं,
हे जननी गे!
पिया मोर बालक।
सखी, पहिरलौं सुंदर चीर,
पिया के देखि जरै शरीर।
गोद में लऽ चलली बाजार,
लोक पूछै बारंबार —
“ई बच्चा के छथि?”
पिया मोर बालक।
नहि मोरा देवर ई,
नहि छोट भाई।
भाग्य लिखल छल एहन,
हमर जीवन साथी।
हे बटोही, जँ भेटै नैहर,
माय-बाबू के कहियो सुनाय।
पिया मोर बालक।
कहिहुन बाबा सँ किनु गाय,
दूध पियाकऽ बढ़त जमाय।
भनहि विद्यापति, सुनु नारी,
धैर्य धरु, भेटत मुरारी।
पिया मोर बालक।
लेखक :- विद्यापति

कमेंट