श्रीगुरु चरन सरोज रज, मन का दर्पण साफ़ कर।
राम नाम की रोशनी में, हर उलझन को मात कर॥
बुद्धि, बल, विवेक नहीं हैं मेरे पास काफी।
पवनसुत, बस तुम ही कर दो, ये मन थोड़ा सा साफ़ी॥
जय हनुमान, संकट के साथी।
जय बजरंगी, हिम्मत के साथी॥
राम के दूत, अंजनी के लाल।
तुम बिन कौन संभाले हाल॥
गदा लिए जो खड़ा रहे, सीना ताने सीधी चाल।
नाम सुनते ही थम जाए, डर का हर एक सवाल॥
छोटा रूप हो या विराट, काम वही एक निभाया।
कभी पहाड़ उठाकर लाए, कभी लंका तक पहुँचाया॥
सुरसा का मुंह, लंका की आग।
हर मुश्किल के सामने तुम ही आग-आग॥
राम काज में जो भी आया।
तुमने पल में रास्ता बनाया॥
लक्ष्मण के लिए संजीवनी, रात अँधेरी, राह कठिन।
तुम लाए जीवन की साँसें, तब जाकर लौटी धड़कन॥
सुग्रीव को तुमने दिया, खोया हुआ विश्वास।
विभीषण को समझा दिया, सच का क्या है आस-पास॥
तुम्हारा नाम जपें तो, सीधा पड़ता है दिल का भार।
कान में बस एक ही धुन—राम, राम, बार-बार॥
भूत-प्रेत की बात नहीं, मन का डर भी भागे।
जब हनुमान साथ खड़े हों, कौन आगे, कौन आगे?॥
संकट कटे, पीड़ा मिटे, जब हाथ उठे तुम्हारा।
अटके काम भी चल पड़ें, जब नाम हो दोबारा॥
जै जै जै हनुमान गुसाईं।
कृपा करो, बस ऐसी ही लाई॥
राम चरण में जो टिके, वही तुम्हें सबसे प्यारा।
हर धड़कन में बस जाओ तुम, पवनपुत्र उजियारा॥
अंत समय तक साथ रहो, यही मेरी अर्जी।
श्रीराम के नाम के संग, रखो मेरी लाज-परवरी॥
जय हनुमान, संकट के साथी।
जय बजरंगी, हिम्मत के साथी॥
राम के दूत, अंजनी के लाल।
तुम बिन कौन संभाले हाल॥
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