श्री जगदम्बा की आराधना

अथ तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम्

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तन्त्रोक्त देवीसूक्तम्

तन्त्रोक्त देवीसूक्तम् देवी की महिमा और उनके सर्वव्यापी स्वरूप का स्तवन करने वाला प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसमें देवी को प्रकृति, शक्ति, चेतना, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, शान्ति, श्रद्धा, लक्ष्मी, दया, मातृशक्ति आदि अनेक रूपों में प्रणाम किया गया है।

इस स्तोत्र में बार-बार “नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः” कहकर जगदम्बा को श्रद्धापूर्वक नमन किया जाता है।

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॥ तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम् ॥

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥
रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः।
ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः॥
कल्याण्यै प्रणतां वृद्धयै सिद्धयै कुर्मो नमो नमः।
नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः॥
दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै।
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः॥
अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः।
नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१०
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥११
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१२
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१३
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१४
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१५
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१६
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१७
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१८
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१९
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२०
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२१
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२२
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२३
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२४
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२५
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२६
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः॥२७
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२८
स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता।
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः॥२९
या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितैरस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते।
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः॥३०
।। इति तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम् ।।

तन्त्रोक्त देवीसूक्त का पारंपरिक भाव

देवीसूक्त में जगदम्बा को केवल किसी एक रूप तक सीमित न मानकर समस्त प्राणियों में विभिन्न शक्तियों के रूप में स्थित बताया गया है। चेतना, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, शक्ति, शान्ति, श्रद्धा, दया, तुष्टि और मातृरूप जैसे भावों में देवी का स्मरण किया जाता है।

इस स्तोत्र का मुख्य भाव देवी की सर्वव्यापकता, शक्ति, करुणा और शरणागति है। अंतिम श्लोकों में देवी से शुभता, कल्याण और संकटों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

देवीसूक्त का पाठ कैसे करें?

महत्वपूर्ण: धार्मिक स्तोत्रों में वर्णित फल और आध्यात्मिक प्रभावों को आस्था एवं पारंपरिक धार्मिक संदर्भ में समझें। इन्हें चिकित्सकीय या अन्य पेशेवर सलाह का विकल्प न मानें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तन्त्रोक्त देवीसूक्तम् क्या है?

यह देवी के अनेक स्वरूपों और सर्वव्यापी शक्ति की स्तुति करने वाला प्रसिद्ध स्तोत्र है।

“या देवी सर्वभूतेषु” का क्या भाव है?

इस स्तोत्र में देवी को सभी प्राणियों में विभिन्न रूपों और शक्तियों के रूप में स्थित मानकर उन्हें बार-बार प्रणाम किया गया है।

तन्त्रोक्त देवीसूक्त में कितने श्लोक हैं?

इस पृष्ठ पर प्रस्तुत पाठ में 30 श्लोक हैं।

क्या देवीसूक्त नवरात्रि में पढ़ सकते हैं?

हाँ, देवी उपासना और नवरात्रि के अवसर पर इसका पाठ किया जा सकता है। विशेष अनुष्ठान में अपनी गुरु या परिवार की परंपरा का पालन करना उचित है।