वैदिक देवी उपासना

अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम्

रात्रि देवी की वैदिक स्तुति • ८ ऋचाएँ
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वेदोक्त रात्रिसूक्तम्

रात्रिसूक्तम् रात्रि देवी की स्तुति करने वाला वैदिक सूक्त है। इसमें रात्रि देवी के दिव्य प्रकाश, संरक्षण और कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण किया जाता है। देवीमाहात्म्य की पाठ-परंपरा में भी रात्रिसूक्त के पाठ का उल्लेख मिलता है।

पाठ संबंधी सूचना: नीचे दिया गया पाठ आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए पाठ को वेब-पेज के लिए व्यवस्थित करके प्रस्तुत किया गया है। वैदिक उच्चारण, स्वर और शाखागत पाठ में भिन्नताएँ हो सकती हैं; शुद्ध वैदिक स्वरों के लिए अपनी परंपरा के आचार्य/गुरु से पाठ सीखना उचित है।

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विनियोग

ॐ रात्रीत्याद्यष्टर्चस्य सूक्तस्य कुशिकः सौभरो रात्रिर्वा भारद्वाजो ऋषिः, रात्रिर्देवता, गायत्री छन्दः, देवीमाहात्म्यपाठे विनियोगः।

॥ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् ॥

ॐ रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभिः।
विश्वा अधि श्रियोऽधित ॥
ओर्वप्रा अमर्त्या निवतो देव्युद्वतः।
ज्योतिषा बाधते तमः ॥
निरु स्वसारमस्कृतोषसं देव्यायती।
अपेदु हासते तमः ॥
सा नो अद्य यस्या वयं नि ते यामन्नविक्ष्महि।
वृक्षे न वसतिं वयः ॥
नि ग्रामासो अविक्षत नि पद्वन्तो नि पक्षिणः।
नि श्येनासश्चिदर्थिनः ॥
यावया वृक्यं वृकं यवय स्तेनमूर्म्ये।
अथा नः सुतरा भव ॥
उप मा पेपिशत्तमः कृष्णं व्यक्तमस्थित।
उष ऋणेव यातय ॥
उप ते गा इवाकरं वृणीष्व दुहितर्दिवः।
रात्रि स्तोमं न जिग्युषे ॥

रात्रिसूक्त का पारंपरिक भाव

रात्रिसूक्त में रात्रि देवी को ऐसी दिव्य शक्ति के रूप में संबोधित किया गया है जो अपने प्रकाश से अंधकार को नियंत्रित करती हैं और जीवों को रात्रि में आश्रय प्रदान करती हैं। सूक्त में भय, चोर, हिंसक जीव और अन्य संकटों से रक्षा की प्रार्थना भी दिखाई देती है।

इस स्तुति का मूल भाव रात्रि देवी की शरण, संरक्षण, शांति और कल्याण की प्रार्थना है।

रात्रिसूक्त का पाठ कैसे करें?

महत्वपूर्ण: यह पृष्ठ धार्मिक एवं आध्यात्मिक अध्ययन के लिए है। वैदिक पाठ की शाखा, स्वर और उच्चारण में परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वेदोक्त रात्रिसूक्तम् क्या है?

यह रात्रि देवी की स्तुति करने वाला वैदिक सूक्त है, जिसमें रात्रि के समय संरक्षण, प्रकाश और कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

रात्रिसूक्त में कितने मंत्र हैं?

इस पृष्ठ पर प्रस्तुत वेदोक्त रात्रिसूक्तम् में आठ ऋचाएँ दी गई हैं।

क्या रात्रिसूक्त देवीमाहात्म्य के पाठ में पढ़ा जाता है?

हाँ, देवीमाहात्म्य की कुछ पारंपरिक पाठ-विधियों में रात्रिसूक्त का विनियोग और पाठ किया जाता है। अपनी परंपरा की विधि का पालन करना उचित है।

क्या रात्रिसूक्त नवरात्रि में पढ़ सकते हैं?

देवी उपासना और नवरात्रि के अवसर पर इसका पाठ किया जा सकता है, विशेषकर जब यह आपकी पारंपरिक पूजा-विधि का अंग हो।