वेदोक्त रात्रिसूक्तम्
रात्रिसूक्तम् रात्रि देवी की स्तुति करने वाला वैदिक सूक्त है। इसमें रात्रि देवी के दिव्य प्रकाश, संरक्षण और कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण किया जाता है। देवीमाहात्म्य की पाठ-परंपरा में भी रात्रिसूक्त के पाठ का उल्लेख मिलता है।
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विनियोग
॥ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् ॥
विश्वा अधि श्रियोऽधित ॥१
ज्योतिषा बाधते तमः ॥२
अपेदु हासते तमः ॥३
वृक्षे न वसतिं वयः ॥४
नि श्येनासश्चिदर्थिनः ॥५
अथा नः सुतरा भव ॥६
उष ऋणेव यातय ॥७
रात्रि स्तोमं न जिग्युषे ॥८
रात्रिसूक्त का पारंपरिक भाव
रात्रिसूक्त में रात्रि देवी को ऐसी दिव्य शक्ति के रूप में संबोधित किया गया है जो अपने प्रकाश से अंधकार को नियंत्रित करती हैं और जीवों को रात्रि में आश्रय प्रदान करती हैं। सूक्त में भय, चोर, हिंसक जीव और अन्य संकटों से रक्षा की प्रार्थना भी दिखाई देती है।
इस स्तुति का मूल भाव रात्रि देवी की शरण, संरक्षण, शांति और कल्याण की प्रार्थना है।
रात्रिसूक्त का पाठ कैसे करें?
- स्वच्छ और शांत स्थान पर बैठकर देवी का स्मरण करें।
- विनियोग का उच्चारण करके सूक्त का पाठ करें।
- वैदिक मंत्रों में उच्चारण और स्वर का विशेष महत्व है; संभव हो तो गुरु से शुद्ध पाठ सीखें।
- देवीमाहात्म्य के पाठ में अपनी परंपरा द्वारा निर्धारित क्रम का पालन करें।
- पाठ के अंत में श्रद्धापूर्वक देवी से शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वेदोक्त रात्रिसूक्तम् क्या है?
यह रात्रि देवी की स्तुति करने वाला वैदिक सूक्त है, जिसमें रात्रि के समय संरक्षण, प्रकाश और कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
रात्रिसूक्त में कितने मंत्र हैं?
इस पृष्ठ पर प्रस्तुत वेदोक्त रात्रिसूक्तम् में आठ ऋचाएँ दी गई हैं।
क्या रात्रिसूक्त देवीमाहात्म्य के पाठ में पढ़ा जाता है?
हाँ, देवीमाहात्म्य की कुछ पारंपरिक पाठ-विधियों में रात्रिसूक्त का विनियोग और पाठ किया जाता है। अपनी परंपरा की विधि का पालन करना उचित है।
क्या रात्रिसूक्त नवरात्रि में पढ़ सकते हैं?
देवी उपासना और नवरात्रि के अवसर पर इसका पाठ किया जा सकता है, विशेषकर जब यह आपकी पारंपरिक पूजा-विधि का अंग हो।