* सटीक समय स्थान (सूर्योदय) के अनुसार भिन्न हो सकता है — अपने स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
श्रावण (सावन) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है — जिसे कहीं-कहीं पवित्रा एकादशी के नाम से भी पुकारा जाता है। श्रावण मास स्वयं भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, और इसी पवित्र मास में पड़ने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। 'कामिका' नाम 'काम' अर्थात् इच्छा से बना है — श्रद्धापूर्वक व्रत करने वाले भक्त की उचित कामनाएँ पूर्ण होती हैं, यही इस व्रत की विशेषता है।
एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रणाम करते हुए पूछा कि श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है और उसका व्रत करने से क्या लाभ प्राप्त होता है। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि वे एक ऐसा पापनाशक प्रसंग सुनाने जा रहे हैं, जो पूर्वकाल में नारदजी के पूछने पर स्वयं ब्रह्माजी ने बताया था।
नारदजी ने ब्रह्माजी के चरणों में प्रार्थना करते हुए पूछा कि श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में कौन-सी एकादशी होती है और उसका माहात्म्य क्या है। इस पर ब्रह्माजी ने बताया कि उस एकादशी का नाम 'कामिका' है, और इसके स्मरण-मात्र से भी वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।
ब्रह्माजी के अनुसार, समुद्र और वन सहित सम्पूर्ण पृथ्वी के दान से जो पुण्य मिलता है, वही पुण्य कामिका एकादशी का व्रत करने से प्राप्त हो जाता है। इसी प्रकार, खूब दूध देने वाली बछड़े सहित गाय को सुवर्ण-सज्जित सींगों सहित अनेक सामग्रियों के साथ दान करने का जो फल शास्त्रों में बताया गया है, विधिपूर्वक यह एकादशी व्रत करने से वही फल भी सहज ही प्राप्त हो जाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट कहा गया कि केवल दिन-भर कुछ-न-कुछ फलाहार करते रहना व्रत नहीं है — सच्चा व्रत संयम, श्रद्धा और नियमपूर्वक आचरण से ही सिद्ध होता है।
ब्रह्माजी ने बताया कि माणिक्य, मोती, मूँगे जैसी बहुमूल्य वस्तुओं से पूजा करने वाले की अपेक्षा तुलसीदल से भगवान का पूजन करने वाला भक्त अधिक पुण्य प्राप्त करता है। तुलसी के दर्शनमात्र से पापों का समूह नष्ट होता है, स्पर्श से शरीर पवित्र होता है, प्रणाम करने से रोग दूर होते हैं, और जल सींचने पर स्वयं यमराज भी भयभीत होते हैं। भगवान के चरणों में तुलसी अर्पित करना मोक्ष-प्राप्ति में सहायक माना गया है।
एकादशी के दिन दीपदान करने वाले को विशेष पुण्य-लाभ प्राप्त होता है — भगवान के सम्मुख दीप जलाने से पितरों को तृप्ति मिलती है और कुल में सुसंतति की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि जो भक्त मौन रहकर, कम बोलकर, भगवान जनार्दन की उपासना करते हुए, निंदनीय कर्मों का त्याग कर रात्रि में थोड़ा जागरण करता है, वह इन सभी पुण्य-फलों को सहज ही प्राप्त कर लेता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने अंत में कहा कि जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक कामिका एकादशी का माहात्म्य श्रवण करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के लोक को प्राप्त करता है। युधिष्ठिर ने इस कथा को सुनकर स्वयं यह व्रत रखने का संकल्प लिया।
पूजा विधि| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि प्रारम्भ | 8 अगस्त 2026, दोपहर 01:59 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 9 अगस्त 2026, सुबह 11:04 बजे |
| व्रत की तिथि | 9 अगस्त 2026 (रविवार) |
| पारण (व्रत खोलना) | 10 अगस्त 2026, सुबह 05:48 से 08:25 बजे के बीच |
| मास एवं पक्ष | श्रावण मास, कृष्ण पक्ष |
सटीक घंटे-मिनट स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करते हैं — पारण से पूर्व अपने शहर का पंचांग अवश्य जाँच लें।
प्रश्नकामिका एकादशी 9 अगस्त 2026, रविवार को है। एकादशी तिथि 8 अगस्त को दोपहर 01:59 बजे आरम्भ होकर 9 अगस्त को सुबह 11:04 बजे समाप्त होगी। पारण 10 अगस्त को सुबह 05:48 से 08:25 बजे के बीच होगा।
'कामिका' शब्द 'काम' अर्थात् इच्छा से बना है। श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करने से भक्तों की उचित कामनाएँ पूर्ण होती हैं, इसीलिए इसे कामिका एकादशी कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार इसके स्मरणमात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है, और विधिपूर्वक व्रत करने से खूब दूध देने वाली गाय के दान के समान पुण्य प्राप्त होता है।
तुलसीदल से भगवान का पूजन विशेष फलदायी माना गया है — तुलसी के दर्शन, स्पर्श व अर्पण से पापों का नाश होता है और भगवद्-कृपा प्राप्त होती है।
हाँ, कामिका एकादशी श्रावण (सावन) मास के कृष्ण पक्ष में आती है। भगवान शिव के प्रिय मास में पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
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