पापांकुशा एकादशी 2026, भगवान विष्णु की पूजा

पापांकुशा एकादशी 2026

22 अक्टूबर, गुरुवार — भगवान विष्णु की आराधना और पापों से मुक्ति की कामना

व्रत तिथि22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)
एकादशी तिथि प्रारम्भ21 अक्टूबर, दोपहर 02:11 बजे
एकादशी तिथि समाप्त22 अक्टूबर, दोपहर 02:47 बजे
पारण23 अक्टूबर, स्थानीय पंचांग के अनुसार

* सटीक पारण समय स्थान और सूर्योदय के अनुसार भिन्न हो सकता है — अपने स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी है और धार्मिक परंपरा में इसे पापों से मुक्ति, आत्मसंयम, भक्ति और सदाचार की भावना से जोड़ा जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा, नाम-स्मरण और एकादशी व्रत कथा का श्रवण करते हैं।

पापांकुशा एकादशी का नाम ही इसके धार्मिक भाव को दर्शाता है। “पापांकुश” का अर्थ ऐसा अंकुश माना जाता है जो पापों और अधर्म से मनुष्य को रोकने तथा आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाने का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ दान, सेवा और संयम को भी महत्व दिया जाता है।

महत्वपूर्ण: पापांकुशा एकादशी के तिथि-समय और पारण में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। इस पृष्ठ पर दिए गए तिथि-समय संदर्भ के लिए हैं; व्रत और पारण से पहले अपने स्थानीय पंचांग में सूर्योदय आधारित समय अवश्य देखें।
महत्व

पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व

भगवान विष्णु की आराधना

पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु की भक्ति और एकादशी व्रत की परंपरा से जुड़ी है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं, तुलसीदल अर्पित करते हैं और विष्णु मंत्र का जप करते हैं।

पापों से मुक्ति की मान्यता

धार्मिक परंपरा में इस एकादशी को मन, वचन और कर्म से हुए दोषों के प्रायश्चित तथा आध्यात्मिक शुद्धि की भावना से जोड़ा जाता है। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि संयम, भक्ति और सदाचार का अभ्यास भी माना जाता है।

दान और सेवा

पापांकुशा एकादशी पर श्रद्धा के अनुसार दान और सेवा करने की परंपरा है। अन्न, वस्त्र, फल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है।

एकादशी व्रत का संदेश

यह व्रत आत्मसंयम, इंद्रिय-निग्रह और भगवान के प्रति समर्पण का अवसर माना जाता है। भक्त दिनभर भगवान विष्णु का नाम-स्मरण, पूजा, पाठ और धार्मिक चिंतन कर सकते हैं।

पूजा विधि

पापांकुशा एकादशी पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  2. पूजा-स्थान को स्वच्छ कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  3. भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसीदल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
  4. धूप, दीप, नैवेद्य और आरती के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें।
  5. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  6. पापांकुशा एकादशी की कथा या माहात्म्य पढ़ें अथवा सुनें।
  7. सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, जलाहार या फलाहार व्रत रखें। स्वास्थ्य-क्षमता के अनुसार ही व्रत का प्रकार चुनें।
  8. द्वादशी के दिन स्थानीय पंचांग में दिए गए पारण समय के अनुसार व्रत खोलें और यथाशक्ति दान-पुण्य करें।

तिथि व समय (2026)

विवरणतिथि / समय
एकादशी तिथि प्रारम्भ21 अक्टूबर 2026, दोपहर 02:11 बजे
एकादशी तिथि समाप्त22 अक्टूबर 2026, दोपहर 02:47 बजे
व्रत की तिथि22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)
पारण23 अक्टूबर 2026, स्थानीय सूर्योदय एवं पंचांग के अनुसार
मास एवं पक्षआश्विन मास, शुक्ल पक्ष

पारण का सटीक समय शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग पर निर्भर करता है — व्रत खोलने से पहले अपने स्थान का पंचांग अवश्य जाँच लें।

प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

पापांकुशा एकादशी 2026 कब है?

पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है। संदर्भित पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 02:11 बजे प्रारम्भ होकर 22 अक्टूबर को दोपहर 02:47 बजे समाप्त होगी।

पापांकुशा एकादशी किस मास और पक्ष में आती है?

पापांकुशा एकादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आती है।

पापांकुशा एकादशी का क्या महत्व है?

धार्मिक परंपरा में पापांकुशा एकादशी को भगवान विष्णु की भक्ति, आत्मसंयम और पापों से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है।

पापांकुशा एकादशी पर क्या पूजा करनी चाहिए?

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, तुलसीदल अर्पण, विष्णु मंत्र का जप, व्रत कथा का श्रवण और सामर्थ्य के अनुसार दान किया जा सकता है।

पापांकुशा एकादशी का पारण कब करना चाहिए?

पारण द्वादशी के दिन स्थानीय पंचांग में दिए गए उपयुक्त समय पर किया जाता है। सटीक समय स्थान और सूर्योदय के अनुसार बदल सकता है।

पापांकुशा एकादशी पर कौन सा मंत्र जपें?

भगवान विष्णु की आराधना के लिए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है।

क्या पापांकुशा एकादशी पर दान करना चाहिए?

हाँ, धार्मिक परंपरा में सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है।

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