* सटीक पारण समय स्थान और सूर्योदय के अनुसार भिन्न हो सकता है — अपने स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी है और धार्मिक परंपरा में इसे पापों से मुक्ति, आत्मसंयम, भक्ति और सदाचार की भावना से जोड़ा जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा, नाम-स्मरण और एकादशी व्रत कथा का श्रवण करते हैं।
पापांकुशा एकादशी का नाम ही इसके धार्मिक भाव को दर्शाता है। “पापांकुश” का अर्थ ऐसा अंकुश माना जाता है जो पापों और अधर्म से मनुष्य को रोकने तथा आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाने का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ दान, सेवा और संयम को भी महत्व दिया जाता है।
पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु की भक्ति और एकादशी व्रत की परंपरा से जुड़ी है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं, तुलसीदल अर्पित करते हैं और विष्णु मंत्र का जप करते हैं।
धार्मिक परंपरा में इस एकादशी को मन, वचन और कर्म से हुए दोषों के प्रायश्चित तथा आध्यात्मिक शुद्धि की भावना से जोड़ा जाता है। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि संयम, भक्ति और सदाचार का अभ्यास भी माना जाता है।
पापांकुशा एकादशी पर श्रद्धा के अनुसार दान और सेवा करने की परंपरा है। अन्न, वस्त्र, फल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है।
यह व्रत आत्मसंयम, इंद्रिय-निग्रह और भगवान के प्रति समर्पण का अवसर माना जाता है। भक्त दिनभर भगवान विष्णु का नाम-स्मरण, पूजा, पाठ और धार्मिक चिंतन कर सकते हैं।
पूजा विधि| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि प्रारम्भ | 21 अक्टूबर 2026, दोपहर 02:11 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 22 अक्टूबर 2026, दोपहर 02:47 बजे |
| व्रत की तिथि | 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) |
| पारण | 23 अक्टूबर 2026, स्थानीय सूर्योदय एवं पंचांग के अनुसार |
| मास एवं पक्ष | आश्विन मास, शुक्ल पक्ष |
पारण का सटीक समय शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग पर निर्भर करता है — व्रत खोलने से पहले अपने स्थान का पंचांग अवश्य जाँच लें।
प्रश्नपापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है। संदर्भित पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 02:11 बजे प्रारम्भ होकर 22 अक्टूबर को दोपहर 02:47 बजे समाप्त होगी।
पापांकुशा एकादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
धार्मिक परंपरा में पापांकुशा एकादशी को भगवान विष्णु की भक्ति, आत्मसंयम और पापों से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, तुलसीदल अर्पण, विष्णु मंत्र का जप, व्रत कथा का श्रवण और सामर्थ्य के अनुसार दान किया जा सकता है।
पारण द्वादशी के दिन स्थानीय पंचांग में दिए गए उपयुक्त समय पर किया जाता है। सटीक समय स्थान और सूर्योदय के अनुसार बदल सकता है।
भगवान विष्णु की आराधना के लिए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है।
हाँ, धार्मिक परंपरा में सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है।
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