सावन 2026 कब से शुरू हो रहा है? 🗓️
हर साल की तरह इस बार भी सावन की तारीख को लेकर लोगों में उलझन है, और वजह जायज़ है — भारत में सावन दो अलग-अलग तरीकों से गिना जाता है। नीचे दोनों तारीखें साफ-साफ दी गई हैं, अपने इलाके के हिसाब से देख लीजिए।
🌞 सूर्य संक्रांति के अनुसार
कर्क संक्रांति के दिन से — नेपाल, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रों में इसी दिन से सावन मान लिया जाता है।
🌕 पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार
उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों (यूपी, बिहार, मिथिला, एमपी, राजस्थान) में यही तारीख मानी जाती है। समापन 28 अगस्त, श्रावण पूर्णिमा को।
मिथिला और बिहार में जो पंचांग सबसे ज़्यादा फॉलो होता है, उसमें सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक ही गिना जाएगा — इसी हिसाब से नीचे चारों सोमवार की तारीखें दी गई हैं।
सावन के चारों सोमवार 🔱
सावन का हर सोमवार शिवजी को समर्पित है, पर व्रत रखने वाले अक्सर पूछते हैं कि उस दिन तिथि-नक्षत्र क्या रहेगा। यहां चारों सोमवार का पूरा ब्यौरा है (दिल्ली/उत्तर भारत पंचांग के अनुसार, अपने शहर के सूर्योदय के हिसाब से थोड़ा फेरबदल हो सकता है)।
3 अगस्त 2026
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| तिथि | पंचमी |
| नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद |
10 अगस्त 2026
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| तिथि | द्वादशी |
| नक्षत्र | पूर्वाषाढ़ा |
17 अगस्त 2026
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| तिथि | पंचमी |
| नक्षत्र | चित्रा |
इसी दिन नागपंचमी भी है — नाग देवता की पूजा का भी विधान रहेगा।
24 अगस्त 2026
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| तिथि | द्वादशी |
| नक्षत्र | पूर्वाषाढ़ा |
सोमवार व्रत के नियम — क्या खाएं, क्या नहीं 🍽️
सावन सोमवार का व्रत हर घर में अलग तरीके से रखा जाता है — कोई निर्जला रहता है, कोई फलाहार लेता है, कोई शाम को एक बार अन्न खा लेता है। कोई एक तरीका "सही" नहीं है, अपनी सेहत और सामर्थ्य के हिसाब से तय करें। नीचे आम तौर पर माने जाने वाले नियम दिए हैं।
✅ व्रत में क्या ले सकते हैं
- फल — केला, सेब, अनार, पपीता
- कुट्टू और सिंघाड़े का आटा
- साबूदाना, समा (मोरधन) के चावल
- दूध, दही, मखाना, मूंगफली
- सेंधा नमक (व्रत वाला नमक)
- शकरकंद, आलू (उबालकर)
❌ इनसे परहेज़ करें
- चावल, गेहूं जैसे सामान्य अनाज
- प्याज़, लहसुन
- मांस, मछली, अंडा
- शराब और नशीले पदार्थ
- बासी या बाहर का तला-भुना खाना
- बाल-नाखून काटना (कई घरों में मान्यता है)
एक बात साफ़ कर दें — अगर आपको शुगर, बीपी या कोई और सेहत से जुड़ी दिक्कत है, तो निर्जला व्रत ज़बरदस्ती न रखें। भगवान शिव भाव के भूखे हैं, आपकी सेहत ख़राब करके रखा व्रत उन्हें भी अच्छा नहीं लगेगा। डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
सावन शिवजी को ही क्यों प्रिय है? 📜
समुद्र मंथन की कथा तो लगभग हर घर में सुनी-सुनाई जाती है, पर उसका सावन से क्या नाता है, ये कम लोग जानते हैं। जब देवता और असुर मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे, तो सबसे पहले जो निकला वो अमृत नहीं, हलाहल विष था। इतना ज़हरीला कि उसकी भाप से ही सृष्टि जलने लगी थी। न देवता उसे संभाल पाए, न असुर। आखिर में सब भगवान शिव के पास गए।
शिवजी ने बिना कुछ सोचे वो विष पी लिया, पर गले से नीचे नहीं जाने दिया — वहीं रोक लिया। इसी वजह से उनका गला नीला पड़ गया, और तभी से वो नीलकंठ कहलाए। देवताओं ने उनकी जलन शांत करने के लिए गंगाजल उनके सिर पर चढ़ाया। यही परंपरा आज तक चली आ रही है — सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाना, दरअसल उसी दिन की याद है जब शिवजी ने सारी सृष्टि की जगह खुद पीड़ा चुनी।
इसीलिए सावन में जटिल पूजा-पाठ की ज़रूरत नहीं मानी जाती। एक लोटा जल, कुछ बेलपत्र, और सच्चा मन — इतना ही शिवजी को भाता है। मिथिला और आसपास के इलाकों में भी यही मान्यता है कि सावन में भोलेनाथ जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं, उतनी जल्दी शायद ही कोई और महीना करता हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल ❓
सावन 2026 कब से कब तक है?
उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार सावन 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा पर समाप्त होगा। नेपाल, उत्तराखंड और हिमाचल में सौर गणना (कर्क संक्रांति) के अनुसार यह 16 जुलाई से ही शुरू माना जाता है।
सावन 2026 में कुल कितने सोमवार पड़ेंगे?
चार सोमवार — 3, 10, 17 और 24 अगस्त 2026।
सावन सोमवार व्रत में क्या खा सकते हैं?
फलाहार, कुट्टू-सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, दूध-दही, मखाना और सेंधा नमक लिया जा सकता है। अनाज, प्याज़-लहसुन और मांसाहार वर्जित माना जाता है।
सावन में बाल-नाखून क्यों नहीं काटते?
यह क्षेत्रीय परंपरा है, कोई सख़्त शास्त्रीय नियम नहीं। सावन को संयम और तप का महीना मानकर कुछ घरों में यह परहेज़ रखा जाता है — हर जगह ज़रूरी नहीं।
सावन शिवरात्रि 2026 कब है?
11 अगस्त 2026 (मंगलवार) की रात को। निशीथ काल पूजा आधी रात के आसपास होती है, 12 अगस्त की सुबह तक चलती है।
रक्षाबंधन सावन में क्यों आता है?
रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो सावन मास का आख़िरी दिन होता है। 2026 में यह 28 अगस्त को है।
तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त की गणना पंचांग और भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदल सकती है। किसी भी अनुष्ठान से पहले अपने स्थानीय पंचांग या पंडितजी से तारीख़ ज़रूर मिला लें।