एकादशी मंत्र संग्रह

एकादशी मंत्र

संकल्प, पारण, ध्यान एवं विष्णु मंत्र — सरल हिंदी अर्थ सहित

एकादशी व्रत में विधि जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है सही मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण। यहाँ प्रत्येक एकादशी (चाहे वह अजा हो, निर्जला हो, या पापांकुशा) पर काम आने वाले सभी प्रमुख मंत्र — संकल्प, ध्यान, पूजन, पारण एवं तुलसी-प्रार्थना — एक ही स्थान पर सरल भावार्थ सहित संकलित किए गए हैं।

ध्यान दें: संकल्प व पारण के लिए दिए गए मंत्रों में स्थान, तिथि व मास की जानकारी अपने अनुसार जोड़नी होती है, या फिर पंडित/पुरोहित से पूर्ण संकल्प करवाना अधिक उचित रहता है।
प्रारम्भ

संकल्प मंत्र (व्रत आरम्भ)

प्रातःकाल स्नान के पश्चात्, पूजा आरम्भ करने से पूर्व, हाथ में जल, अक्षत, पुष्प व तिल लेकर पूर्व दिशा या भगवान विष्णु की ओर मुख करके यह संकल्प लें:

ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्वेतवराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे... मम सर्वपापक्षयपूर्वकं श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं (एकादशी का नाम) एकादशी व्रतं करिष्ये।
सरल भावार्थ: हे भगवान विष्णु! मैं अपने समस्त पापों के नाश और आपकी कृपा-प्राप्ति हेतु आज इस एकादशी का व्रत करने का संकल्प लेता/लेती हूँ।

संकल्प के पश्चात् हाथ का जल भूमि पर या ताम्र-पात्र में छोड़ दें, और तत्पश्चात् पूजा आरम्भ करें।

पूजन

ध्यान मंत्र

पूजा-स्थान पर भगवान विष्णु की मूर्ति/चित्र के समक्ष हाथ जोड़कर, नेत्र बंद कर निम्न ध्यान मंत्र का उच्चारण करें:

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
सरल भावार्थ: शांत स्वरूप वाले, शेषनाग पर शयन करने वाले, कमलनाभ, समस्त देवताओं के स्वामी, सम्पूर्ण विश्व के आधार, आकाश के समान व्यापक, मेघ-वर्ण, शुभ अंगों वाले, लक्ष्मीपति, कमल-नयन, योगियों द्वारा ध्यान करने योग्य, संसार के भय को हरने वाले सर्वलोकनाथ भगवान विष्णु को मैं नमन करता/करती हूँ।
जप

विष्णु मंत्र (जप हेतु)

पूजन के पश्चात् माला द्वारा निम्न मंत्रों का यथाशक्ति जप करें — 11, 21, 51 या 108 बार:

मंत्रप्रयोग
ॐ नमो भगवते वासुदेवायमुख्य द्वादशाक्षर मंत्र — संपूर्ण एकादशी पूजन में सर्वाधिक जपा जाने वाला
ॐ नमो नारायणायअष्टाक्षर मंत्र — ध्यान व शांति हेतु
ॐ ऋषिकेशाय नमःअजा एकादशी व अन्य कथाओं में वर्णित नाम-मंत्र

संभव हो तो जप के साथ विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ भी करें — यह एकादशी पर विशेष फलदायी माना गया है।

तुलसी अर्पण

तुलसी प्रार्थना मंत्र

भगवान विष्णु को तुलसीदल अर्पित करते समय (ध्यान रहे, पत्ते एक दिन पूर्व दशमी को ही तोड़ लें) यह मंत्र पढ़ें:

तुलसी अमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिया।
केशवार्थे विचिन्वामि वरदा भव शोभने॥
सरल भावार्थ: हे तुलसी! तुम अमृत से उत्पन्न हुई हो और सदा भगवान केशव को प्रिय हो। मैं तुम्हें भगवान केशव की सेवा हेतु चुन रहा/रही हूँ — हे शोभनशीले, मुझ पर वरदान की कृपा करो।
समापन

पारण मंत्र (व्रत खोलते समय)

द्वादशी तिथि के शुभ पारण मुहूर्त में, व्रत खोलने से पूर्व भगवान विष्णु को नमन करते हुए यह मंत्र पढ़ें:

क्षमस्व वासुदेव त्वं व्रतस्यास्य समापने।
न्यूनं वा अधिकं वापि यत्कृतं परमेश्वर॥
सरल भावार्थ: हे वासुदेव! इस व्रत को पूर्ण करते समय मुझसे जो भी न्यूनता (कमी) अथवा अधिकता हुई हो, हे परमेश्वर, आप उसे क्षमा करें।
  1. पारण सदैव निर्धारित मुहूर्त के भीतर ही करें — मुहूर्त से पूर्व या द्वादशी तिथि समाप्त होने के पश्चात् पारण न करें।
  2. सर्वप्रथम भगवान को भोग अर्पित करें, फिर तुलसी-तीर्थ या चरणामृत ग्रहण कर व्रत खोलें।
  3. यथाशक्ति अन्न-दान, वस्त्र-दान अथवा निर्धन को भोजन कराकर ही स्वयं अन्न ग्रहण करें।
महत्व

एकादशी माहात्म्य श्लोक

एकादशी व्रत की कथा सुनने/पढ़ने से पूर्व अथवा पश्चात्, इसका माहात्म्य दर्शाने वाला यह श्लोक पढ़ना शुभ माना जाता है:

एकादश्यां न भुञ्जीत विष्णोः प्रीतिकरं यतः।
उपवासेन तेनैव सर्वपापैः प्रमुच्यते॥
सरल भावार्थ: एकादशी के दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस उपवास मात्र से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

एकादशी व्रत का संकल्प कब लेना चाहिए?

संकल्प एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करने के बाद, पूजा आरम्भ करने से पहले जल, अक्षत, पुष्प व तिल हाथ में लेकर लिया जाता है। कुछ परम्पराओं में दशमी तिथि की रात्रि से ही नियम-संकल्प आरम्भ हो जाता है।

पारण मंत्र कब और कैसे पढ़ा जाता है?

पारण मंत्र द्वादशी तिथि के शुभ पारण मुहूर्त में, व्रत खोलने से पूर्व पढ़ा जाता है। इसमें भगवान विष्णु से व्रत के दौरान हुई किसी भी न्यूनता के लिए क्षमा-याचना की जाती है।

एकादशी पर कौन सा मंत्र जपना सबसे शुभ माना जाता है?

'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' द्वादशाक्षर मंत्र एकादशी व्रत में सर्वाधिक जपा जाने वाला मंत्र है। इसके साथ विष्णु सहस्रनाम व तुलसी स्तुति का पाठ भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

क्या एकादशी पर तुलसी अर्पित करने का कोई विशेष मंत्र है?

हाँ, तुलसी अर्पण के समय 'तुलसी अमृतजन्मासि...' मंत्र पढ़ा जाता है, जिसमें तुलसी माता को सदैव विष्णु-प्रिय व पूज्य बताया गया है। ध्यान रहे, एकादशी को तुलसीदल तोड़ना वर्जित है, अतः पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ लें।

हर एकादशी की सटीक तिथि, मुहूर्त और पंचांग देखें

पंचांग देखें →