।। संपूर्ण मंत्र पुष्पांजलि ।।

पूजा-पाठ के समापन पर भगवान को पुष्प अर्पित करते समय बोला जाने वाला यह मंत्र ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि और सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त करने हेतु पढ़ा जाता है। यहाँ संपूर्ण पाठ हिंदी भावार्थ सहित दिया गया है।

पुष्पांजलि मंत्र क्या है?

"मंत्र पुष्पांजलि" अथवा "मंत्र पुष्पम्" वैदिक ऋचाओं तथा गायत्री-शैली के श्लोकों का एक संग्रह है, जिसे किसी भी पूजा, हवन, आरती अथवा अनुष्ठान के अंत में भगवान को पुष्प अर्पित करते समय पढ़ा जाता है। इसमें यज्ञ की महिमा, ऐश्वर्य व साम्राज्य की कामना, तथा प्रमुख देवी-देवताओं — गणेश, विष्णु, लक्ष्मी, कृष्ण, सूर्य, हनुमान, ब्रह्मा, तुलसी, राधा और शिव (रुद्र) — के गायत्री मंत्र सम्मिलित हैं। अंत में देवाधिदेव को सुगंधित पुष्पों सहित पुष्पांजलि अर्पित की जाती है।

प्रथम:

ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन् ।
ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा: ॥
ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने।
नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे।
स मस कामान् काम कामाय मह्यं।
कामेश्र्वरो वैश्रवणो ददातु कुबेराय वैश्रवणाय।
महाराजाय नम: ।
ॐ स्वस्ति, साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं
वैराज्यं पारमेष्ट्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं ।
समन्तपर्यायीस्यात् सार्वभौमः सार्वायुषः आन्तादापरार्धात् ।
पृथीव्यै समुद्रपर्यंताया एकरा‌ळ इति ॥
ॐ तदप्येषः श्लोकोभिगीतो।
मरुतः परिवेष्टारो मरुतस्यावसन् गृहे।
आविक्षितस्य कामप्रेर्विश्वेदेवाः सभासद इति ॥

गायत्री मंत्र

हरि: ॐ एक दंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दंतीप्रचोदयात्।
हरि:ॐ नारायण विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्।
हरि:ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।
हरि: ॐ नंद नन्दनाय विद्महे यशोदा नंदनाय धीमहि । तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात्।
हरि: ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि । तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्।
हरि ॐ अंजनी सुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि । तन्नो हनुमत प्रचोदयात्।
हरि ॐ चतुर्मुखाय विद्महे हंसारुढ़ाय धीमहि । तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्।
हरि: ॐ परमहंसाय विद्महे महाहंसाय धीमहि । तन्नो हंसः प्रचोदयात्।
हरि: ॐ श्री तुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै च धीमहि । तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।
हरि: ॐ वृषभानुजायै च विद्महे कृष्णप्रियायै च धीमहि । तन्नो राधा प्रचोदयात्।
हरिः ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि । तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।

पुष्पांजलि श्लोक

ॐ सेवन्तिका बकुल चम्पक पाटलाब्जै,
पुन्नाग जाति करवीर रसाल पुष्पैः बिल्व प्रवाल।
तुलसीदल मंजरीभिस्त्वां पूजयामि जगदीश्वर मे प्रसीद।।
ॐ मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि।
आपके भेजे टेक्स्ट में अंतिम शब्द "मं" पर कट गया था — यह सामान्यतः पूजा-पद्धति में प्रचलित समापन-पंक्ति "ॐ मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि" ही होती है, इसलिए वही जोड़ी है। कृपया एक बार जाँच लें कि यह आपकी परंपरा से मेल खाता है।

पुष्पांजलि मंत्र पाठ विधि व नियम

  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर बैठें।
  • दाहिने हाथ में जल, अक्षत (चावल) और ताज़े पुष्प लें।
  • संपूर्ण मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान की मूर्ति/प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करें।
  • प्रत्येक देवता के गायत्री मंत्र के समय संबंधित देवता का मानसिक ध्यान करें।
  • अंतिम श्लोक के साथ हाथ में शेष बचे पुष्प व जल भगवान के चरणों में अर्पित कर दें।
  • यह मंत्र प्रायः आरती के तुरंत पश्चात, पूजा के समापन चरण में पढ़ा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्र पुष्पांजलि क्या है?

मंत्र पुष्पांजलि पूजा के अंत में भगवान को पुष्प अर्पित करते हुए पढ़ा जाने वाला वैदिक श्लोकों का समूह है, जिसमें ऐश्वर्य, समृद्धि और संपूर्ण देवताओं के आशीर्वाद की कामना की जाती है।

पुष्पांजलि मंत्र कब बोला जाता है?

यह मंत्र किसी भी पूजा, हवन या आरती के समापन पर, भगवान को फूल अर्पित करते समय बोला जाता है। इसे "मंत्र पुष्पम्" भी कहा जाता है।

पुष्पांजलि में कौन-कौन से देवताओं के गायत्री मंत्र आते हैं?

इसमें गणेश, विष्णु, लक्ष्मी, कृष्ण, सूर्य, हनुमान, ब्रह्मा, हंस, तुलसी, राधा और रुद्र (शिव) के गायत्री मंत्र सम्मिलित होते हैं।

पुष्पांजलि अर्पित करते समय किन फूलों का प्रयोग करना चाहिए?

सेवंती, बकुल, चंपा, पाटल, कमल, पुन्नाग, चमेली, कनेर, आम के फूल, बिल्वपत्र और तुलसीदल के साथ पुष्पांजलि अर्पित की जाती है।

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