भगवान विष्णु पूजन, श्रावण पुत्रदा एकादशी संतान सुख व्रत

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026

23 अगस्त, रविवार — संतान सुख की कामना हेतु पति-पत्नी व्रत

व्रत तिथि23 अगस्त 2026 (रविवार)
एकादशी तिथि प्रारम्भ23 अगस्त, रात 02:00 बजे
एकादशी तिथि समाप्त24 अगस्त, रात 04:18 बजे
पारण24 अगस्त, सूर्योदय के पश्चात्

तिथि व समय (2026)

विवरणतिथि / समय
एकादशी तिथि प्रारम्भ23 अगस्त 2026, रात 02:00 बजे
एकादशी तिथि समाप्त24 अगस्त 2026, रात 04:18 बजे
व्रत की तिथि23 अगस्त 2026 (रविवार)
पारण (व्रत खोलना)24 अगस्त 2026, 1:00 बजे दिन
मास एवं पक्षश्रावण मास, शुक्ल पक्ष
पारण मंत्र, एकादशी मंत्र और जानें

श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। 'पुत्रदा' का अर्थ है पुत्र देने वाली — यह व्रत विशेष रूप से उन दम्पतियों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है जो संतान-सुख की कामना करते हैं, और परम्परा के अनुसार पति-पत्नी दोनों मिलकर श्रद्धापूर्वक इसे रखते हैं। वर्ष में एक और पुत्रदा एकादशी पौष मास के शुक्ल पक्ष में भी आती है, इसलिए इसे श्रावण अथवा सावन पुत्रदा एकादशी कहकर अलग पहचाना जाता है।

एक स्पष्टीकरण: श्रावण पुत्रदा एकादशी की कथा भविष्य पुराण परम्परा में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाए गए राजा महीजित के प्रसंग पर आधारित है। नीचे यह कथा उसी परम्परागत क्रम में प्रस्तुत की गई है।
कथा

श्री श्रावण पुत्रदा एकादशी की कथा

धर्मराज युधिष्ठिर का प्रश्न

युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में किस नाम की एकादशी होती है। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि इसे 'पुत्रदा' एकादशी कहा जाता है, और फिर उन्होंने द्वापर युग की एक कथा सुनानी आरम्भ की।

राजा महीजित की व्यथा

माहिष्मतीपुर नगरी में प्रजापालक राजा महीजित राज्य करते थे। धर्मपूर्वक शासन करने के बावजूद उन्हें कोई संतान नहीं थी, जिस कारण उन्हें अपना विशाल राज्य भी सुखदायक प्रतीत नहीं होता था। अपनी बढ़ती अवस्था देखकर राजा को गहरी चिंता हुई। उन्होंने प्रजा को एकत्र कर अपनी व्यथा सुनाई — उन्होंने कभी अन्याय से धन नहीं कमाया, ब्राह्मणों-देवताओं का धन कभी नहीं लिया, प्रजा का पुत्रवत् पालन किया, फिर भी उन्हें संतान क्यों नहीं मिली, यह प्रश्न उन्हें कचोटता था।

महर्षि लोमश से भेंट

राजा के दुःख से द्रवित होकर प्रजा और पुरोहित उपाय खोजने वन में निकल पड़े, जहाँ उन्हें त्रिकालज्ञ महामुनि लोमश के दर्शन हुए। लोमशजी ने प्रजा की व्यथा सुनकर कुछ क्षण ध्यानमग्न होकर राजा के पूर्वजन्म का वृत्तांत जान लिया।

पूर्वजन्म का रहस्य

महर्षि लोमश ने बताया कि राजा महीजित पूर्वजन्म में एक निर्धन वैश्य था, जो लोगों का धन चूसता था। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में एक दिन जब वह किसी गाँव की सीमा पर एक जलाशय पर जल पीने रुका, तभी वहाँ प्यास और गर्मी से व्याकुल बछड़े सहित एक गाय भी जल पीने आई। वैश्य ने उस गाय को जल पीने से रोककर हाँक दिया। महर्षि के अनुसार इसी पापकर्म के फलस्वरूप राजा को इस जन्म में संतान-सुख से वंचित रहना पड़ा।

उपाय — पुत्रदा एकादशी व्रत

प्रजाजनों ने पूछा कि इस पाप के प्रायश्चित का कोई उपाय बताया जाए। महर्षि लोमश ने कहा कि श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी मनोवांछित फल प्रदान करने वाली है, और सभी प्रजाजन मिलकर यदि श्रद्धापूर्वक इसका व्रत रखें, तो राजा का कल्याण हो सकता है।

प्रजा का व्रत और पुत्र-प्राप्ति

महर्षि को प्रणाम कर प्रजाजन नगर लौटे और सभी ने मिलकर विधिपूर्वक पुत्रदा एकादशी का व्रत, उपवास व रात्रि-जागरण किया। इस व्रत का निर्मल पुण्य उन्होंने अपने राजा को अर्पित कर दिया। इसके फलस्वरूप रानी ने गर्भधारण किया और यथासमय एक बलवान, तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया।

कथा का संदेश

भगवान श्रीकृष्ण ने अंत में कहा कि इस एकादशी का माहात्म्य सुनने-पढ़ने मात्र से भी मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है और इस लोक में सुख पाकर परलोक में उत्तम गति को प्राप्त होता है। इसी कारण संतान-सुख की कामना करने वाले दम्पति आज भी श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखते हैं।

पूजा विधि

श्रावण पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

  1. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ (संभव हो तो पीले) वस्त्र धारण करें।
  2. घर के पूजा-स्थान को स्वच्छ कर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
  3. पति-पत्नी दोनों मिलकर संकल्प लें और साथ बैठकर पूजन करें।
  4. भगवान को पीले वस्त्र, तुलसीदल, पंचामृत और फल अर्पित करें (तुलसी बिना अर्पित न करें)।
  5. षोडशोपचार पूजन करें — धूप, दीप, नैवेद्य, आरती के साथ।
  6. तुलसी माता का पूजन करें, तुलसी में कलावा बाँधें और श्रृंगार की वस्तुएँ अर्पित करें।
  7. "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
  8. श्रावण पुत्रदा एकादशी की व्रत-कथा (राजा महीजित प्रसंग) सुनें/पढ़ें।
  9. रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करें; निर्जल अथवा फलाहार व्रत रखें (क्षमता अनुसार)।
  10. अगले दिन (पारण दिवस) शास्त्रोक्त मुहूर्त में ही व्रत खोलें, दान व सेवा करें।

तिथि व समय (2026)

विवरणतिथि / समय
एकादशी तिथि प्रारम्भ23 अगस्त 2026, रात 02:00 बजे
एकादशी तिथि समाप्त24 अगस्त 2026, रात 04:18 बजे
व्रत की तिथि23 अगस्त 2026 (रविवार)
पारण (व्रत खोलना)24 अगस्त 2026, सूर्योदय के पश्चात्
मास एवं पक्षश्रावण मास, शुक्ल पक्ष

सटीक घंटे-मिनट स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करते हैं — पारण से पूर्व अपने शहर का पंचांग अवश्य जाँच लें।

प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 में कब है?

श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026, रविवार को है। एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 02:00 बजे आरम्भ होकर 24 अगस्त को रात 04:18 बजे समाप्त होगी। पारण 24 अगस्त को सूर्योदय के पश्चात् किया जाएगा।

पुत्रदा एकादशी का नाम 'पुत्रदा' क्यों पड़ा?

'पुत्रदा' का अर्थ है पुत्र देने वाली। यह व्रत विशेष रूप से उन दम्पतियों के लिए है जो संतान-सुख, विशेषकर पुत्र-प्राप्ति की कामना करते हैं, इसलिए इसका नाम पुत्रदा एकादशी पड़ा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा किससे जुड़ी है?

यह कथा माहिष्मतीपुर के निःसन्तान राजा महीजित से जुड़ी है। महर्षि लोमश के परामर्श पर प्रजा ने विधिपूर्वक यह व्रत रखकर उसका पुण्य राजा को अर्पित किया, जिसके फलस्वरूप रानी ने बलवान पुत्र को जन्म दिया।

क्या यह व्रत पति-पत्नी दोनों को मिलकर रखना चाहिए?

हाँ, संतान-सुख की कामना हेतु परम्परागत रूप से यह व्रत पति-पत्नी दोनों मिलकर रखते हैं और साथ में तुलसी पूजन कर वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

क्या पौष पुत्रदा एकादशी और श्रावण पुत्रदा एकादशी एक ही हैं?

नहीं, वर्ष में दो पुत्रदा एकादशी आती हैं — एक पौष शुक्ल पक्ष में (दिसम्बर/जनवरी) और दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष में (जुलाई/अगस्त)। दोनों का फल संतान-सुख देने वाला माना गया है, केवल मास व पक्ष भिन्न हैं।

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