आश्विन कृष्ण अष्टमी · मैथिली/मिथिला का प्रमुख पर्व

जितिया (जीवित्पुत्रिका व्रत)

संतानों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और दीर्घायु की कामना से माताओं द्वारा रखा जाने वाला प्रसिद्ध तीन-दिवसीय व्रत — नहाय-खाय, खर जितिया और पारण

🪷 2026 में मुख्य जितिया व्रत — 3 अक्टूबर, शनिवार
मातृ-स्नेह · संकल्प · संतति की मंगलकामना

जितिया व्रत मातृ-संकल्प और संतान के कल्याण की कामना से जुड़ा पर्व है। ऊपर का चित्र प्रतीकात्मक है, किसी विशिष्ट शास्त्रीय मूर्ति का दावा नहीं।

समय संबंधी महत्वपूर्ण सूचना: जितिया की तिथि और तिथि-अंत का समय शहर के अनुसार बदल सकता है। इस पेज पर 2026 के लिए दरभंगा/मिथिला को मुख्य क्षेत्रीय संदर्भ रखा गया है। Drik Panchang के दरभंगा गणना-पृष्ठ पर 3 अक्टूबर 2026 को अष्टमी 07:59 बजे शुरू और 4 अक्टूबर 2026 को 05:51 बजे समाप्त दिखाई गई है। पारण का अंतिम समय अपने स्थानीय पंचांग, सूर्योदय और परिवार की परंपरा से मिलान करें।
लेखक: ShivMarg Editorial Team
अंतिम तथ्य-जांच: 8 सितंबर 2026
क्षेत्रीय संदर्भ: दरभंगा / मिथिला
संपादकीय तरीका: पंचांग समय और क्षेत्रीय परंपराओं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। जहां परंपरा परिवार या क्षेत्र के अनुसार बदलती है, उसे सार्वदेशिक नियम के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

2026 जितिया समय — स्रोतों से सत्यापन

दरभंगा · मिथिला संदर्भ

मुख्य जितिया व्रत: शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

अष्टमी: 03 अक्टूबर 07:59 → 04 अक्टूबर 05:51

यह समय Drik Panchang के Darbhanga 2026 calculation से लिया गया क्षेत्रीय reference है। अन्य शहरों में तिथि कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है।

क्षेत्रीय पंचांग संदर्भ

मिथिला पंचांग परंपरा

2026–27 के मिथिला पंचांग-चक्र में जितिया को 3 अक्टूबर 2026 बताया गया है। मिथिला क्षेत्र में पर्व-त्योहार की तिथियों में पंचांगकारों के बीच एकरूपता रखने पर भी जोर दिया गया है।

क्षेत्रीय रिपोर्ट देखें
समय गणना संदर्भ

Drik Panchang · Darbhanga

3 अक्टूबर 2026, शनिवार; अष्टमी 07:59 बजे शुरू और 4 अक्टूबर 05:51 बजे समाप्त। यह शहर-विशिष्ट गणना है, इसलिए इसे पूरे भारत का एकमात्र समय न मानें।

Jivitputrika timing देखें
मैथिली सांस्कृतिक संदर्भ

मिथिला में जितिया

जितिया को मिथिला और आसपास के क्षेत्रों में तीन-दिवसीय मातृ-व्रत के रूप में वर्णित किया जाता है—नहाय-खाय, मुख्य निर्जला व्रत और पारण।

मिथिला पर्व संदर्भ
सहायक क्रॉस-चेक

2026 Jitiya calendar references

अन्य 2026 references भी 3 अक्टूबर को मुख्य जितिया और 2 अक्टूबर को नहाय-खाय बताते हैं; पारण 4 अक्टूबर की सुबह स्थानीय तिथि-अंत/सूर्योदय के बाद रखा जाता है।

सहायक संदर्भ देखें
क्यों अलग-अलग वेबसाइट पर समय अलग दिख सकता है? पंचांग की तिथि-अंत, सूर्योदय और स्थानीय गणना location-specific होती है। इसलिए ShivMarg पर भी किसी दूसरे शहर का पारण समय copy करके सभी जगह लागू नहीं किया जाना चाहिए। उपयोगकर्ता को शहर-विशिष्ट Panchang Calculator से अंतिम समय verify करने का विकल्प देना बेहतर है।

जितिया 2026 — एक नजर में

पर्व का नामजितिया / जिउतिया / जीवित्पुत्रिका व्रत
अंग्रेज़ी नामJitiya / Jivitputrika Vrat
मुख्य तिथि3 अक्टूबर 2026, शनिवार
चंद्र तिथिआश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी
नहाय-खाय2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
मुख्य व्रत3 अक्टूबर 2026, शनिवार — पारंपरिक रूप में निर्जला
अष्टमी प्रारंभदरभंगा संदर्भ: 3 अक्टूबर, 07:59 बजे
अष्टमी समाप्तदरभंगा संदर्भ: 4 अक्टूबर, 05:51 बजे
पारण4 अक्टूबर 2026 की सुबह; स्थानीय अष्टमी समाप्ति और सूर्योदय के अनुसार
मुख्य आराध्य/कथा-केंद्रजीमूतवाहन; कई क्षेत्रों में चील-सियारिन की कथा भी
मुख्य क्षेत्रमिथिला/बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा नेपाल का तराई-मधेश क्षेत्र
व्रत का उद्देश्यसंतानों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, दीर्घायु और मंगल की कामना

जितिया के तीन दिन — पूरा क्रम

नहाय-खाय

शुक्रवार, 2 अक्टूबर

स्नान, शुद्धि और परिवार/क्षेत्र की परंपरा के अनुसार एक बार भोजन।

खर जितिया

शनिवार, 3 अक्टूबर

आश्विन कृष्ण अष्टमी का मुख्य व्रत; पारंपरिक रूप में निर्जला और कथा-पूजन।

पारण

रविवार, 4 अक्टूबर

स्थानीय तिथि-अंत और सूर्योदय की स्थिति पूरी होने के बाद व्रत खोलना।

जितिया को केवल एक दिन का festival बताने के बजाय तीन चरणों में समझना अधिक सही है। क्षेत्र और परिवार के अनुसार भोजन, कथा, मूर्ति/प्रतीक और पारण की विधि में अंतर मिल सकता है।

मिथिला में जितिया — खास परंपराएँ

मिथिला विशेषमैथिली परंपराबिहार · नेपाल तराई

जितिया केवल “निर्जला व्रत” नहीं है

मिथिला में जितिया मातृ-संकल्प, लोककथा और घरेलू परंपरा से जुड़ा पर्व है। उपलब्ध सांस्कृतिक विवरणों में नहाय-खाय, मुख्य निर्जला व्रत और पारण के साथ मड़ुआ/मरुआ की रोटी, स्थानीय साग-सब्जियों, कथा-श्रवण तथा चील-सियारिन से जुड़ी लोकपरंपराओं का उल्लेख मिलता है।

लेकिन भोजन को सार्वदेशिक नियम न समझें। कुछ परिवारों में नहाय-खाय के भोजन की परंपरा अलग हो सकती है; इसलिए इस पेज पर “क्षेत्रीय परंपरा” और “अनिवार्य पंचांग तथ्य” को अलग रखा गया है।

नहाय-खाय में क्या खाया जाता है?

मिथिला और आसपास के क्षेत्रों में मड़ुआ/मरुआ की रोटी तथा स्थानीय सब्जियों का उल्लेख मिलता है। कुछ समुदायों में मछली-भात की परंपरा भी दर्ज है, जबकि अन्य परिवार पूर्ण शाकाहारी भोजन करते हैं। इसलिए किसी एक भोजन को “सभी मिथिला परिवारों के लिए अनिवार्य” कहना उचित नहीं है।

ओठगन / सरगी की परंपरा

कई परिवारों में मुख्य निर्जला दिन से पहले भोर से पहले अंतिम भोजन/जल ग्रहण करने की परंपरा मिलती है। इसका समय परिवार की परंपरा और स्थानीय दिन-गणना के अनुसार रखा जाता है।

जितिया पूजा विधि — सरल और सुरक्षित क्रम

नीचे दिया गया क्रम सामान्य मार्गदर्शन है। आपके परिवार, कुल या स्थानीय पुरोहित की विधि अलग हो तो उसी को प्राथमिकता दें।

  1. नहाय-खाय: स्नान करके पूजा-स्थान साफ करें और परिवार की परंपरा के अनुसार भोजन ग्रहण करें।
  2. संकल्प: संतानों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सद्बुद्धि और दीर्घायु की कामना से व्रत का संकल्प लें।
  3. मुख्य दिन की तैयारी: पूजा के लिए दीप, धूप, पुष्प, अक्षत, रोली/सिंदूर, जल, फल और स्थानीय परंपरा की सामग्री रखें।
  4. जीमूतवाहन स्मरण: जीमूतवाहन की कथा सुनें/पढ़ें और उनकी करुणा व त्याग को स्मरण करें।
  5. चील-सियारिन कथा: जिन परिवारों में यह लोककथा कही जाती है, वहां कथा-श्रवण और प्रतीकात्मक पूजा की जाती है।
  6. व्रत: पारंपरिक रूप में निर्जला व्रत रखा जाता है। स्वास्थ्य की स्थिति अनुकूल न हो तो कठोर व्रत को अपने ऊपर थोपना आवश्यक नहीं।
  7. पारण: 4 अक्टूबर को स्थानीय पंचांग के अनुसार अष्टमी समाप्त होने और आवश्यक सूर्योदय शर्त पूरी होने के बाद पूजा करके व्रत खोलें।

जितिया पूजा सामग्री

दीपधूपपुष्पअक्षतरोली/सिंदूरशुद्ध जलफलप्रसादकुशालाल/पीला वस्त्रजीउतिया/जितिया सूत्रस्थानीय परंपरा की सामग्री
महत्वपूर्ण: जितिया की सामग्री हर क्षेत्र में समान नहीं है। जो सामग्री आपके परिवार की परंपरा में पीढ़ियों से चली आ रही है, उसे प्राथमिकता दें। किसी दूसरे क्षेत्र की सूची को अनिवार्य सूची न मानें।

जितिया की प्रमुख कथा

जीमूतवाहन और नाग-पुत्र की कथा

जितिया से जुड़ी प्रसिद्ध कथा में जीमूतवाहन को करुणाशील और त्यागी राजकुमार के रूप में वर्णित किया जाता है। कथा के अनुसार एक नाग-माता अपने पुत्र शंखचूड़ को गरुड़ के सामने बलि के लिए जाने से दुखी थी। जीमूतवाहन ने उस बालक की रक्षा के लिए स्वयं को उसके स्थान पर प्रस्तुत किया। उनके आत्म-त्याग से गरुड़ प्रभावित हुए और नागों के प्रति हिंसा रोकने की कथा आगे बढ़ती है।

इसी कथा के कारण जीवित्पुत्रिका नाम को संतान के जीवन और संरक्षण की भावना से जोड़ा जाता है। कथा के अलग-अलग पाठों में विवरण बदल सकते हैं; इसलिए इसे धार्मिक/लोकपरंपरा के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित है।

चील और सियारिन की लोककथा

कई उत्तर भारतीय और मैथिली लोकपरंपराओं में चील और सियारिन की कथा भी जितिया व्रत के साथ सुनाई जाती है। यह कथा व्रत-निष्ठा, संयम और परिणामों के लोक-संदेश से जुड़ी है। परिवार में प्रचलित पाठ को ही कथा-श्रवण में प्राथमिकता दें।

जितिया पारण 2026 — सबसे जरूरी बात

दरभंगा संदर्भ

अष्टमी समाप्ति: 4 अक्टूबर, लगभग 05:51 बजे

पारण का अंतिम समय केवल इस एक संख्या से तय नहीं किया जाना चाहिए। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की पारण-नियमावली को भी देखना जरूरी है। दरभंगा के लिए उपलब्ध sunrise data लगभग 05:40 के आसपास है; इसलिए अष्टमी समाप्ति के बाद का समय पारण के लिए निर्णायक window बनता है।

सही तरीका: 4 अक्टूबर की सुबह पहले अपने शहर का Panchang Calculator खोलें → अष्टमी समाप्ति देखें → स्थानीय सूर्योदय देखें → फिर परिवार/पंचांग में निर्धारित पारण विधि के अनुसार व्रत खोलें।

यहां दूसरे शहर का exact पारण समय copy नहीं किया गया है। यही approach ShivMarg के लिए अधिक विश्वसनीय है, क्योंकि जितिया का पारण तिथि और स्थानीय सूर्योदय दोनों से जुड़ा है।

निर्जला व्रत और स्वास्थ्य — जिम्मेदार जानकारी

जितिया का पारंपरिक रूप बहुत कठोर निर्जला व्रत है, लेकिन धार्मिक व्रत के कारण किसी को स्वास्थ्य जोखिम नहीं लेना चाहिए। गर्भवती, स्तनपान कराने वाली, बुजुर्ग, मधुमेह/किडनी/हृदय जैसी बीमारी वाले या नियमित दवा लेने वाले व्यक्ति बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत न रखें।

यदि कठोर व्रत स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं है, तो परिवार की परंपरा के अनुसार फलाहार/जल ग्रहण सहित सुरक्षित धार्मिक विकल्प अपनाया जा सकता है। दवा बंद करना या डॉक्टर की सलाह के विरुद्ध उपवास करना उचित नहीं है।

इन बातों को बिना जांचे न मानें

❌ पूरे भारत के लिए एक ही पारण समय

गलत। स्थानीय तिथि-अंत और सूर्योदय के कारण समय बदलता है।

❌ हर परिवार में एक जैसा भोजन

गलत। मिथिला और आसपास के क्षेत्रों में नहाय-खाय के भोजन की अलग परंपराएँ हैं।

❌ निर्जला व्रत सभी के लिए अनिवार्य

परंपरा में निर्जला रूप प्रमुख है, लेकिन स्वास्थ्य-सुरक्षा पहले आती है।

❌ एक ही कथा का एकमात्र पाठ

जीमूतवाहन कथा के साथ चील-सियारिन की लोककथा भी कई समुदायों में सुनाई जाती है।

जितिया तैयारी चेकलिस्ट

ShivMarg ने यह जानकारी कैसे तैयार की?

पंचांग तथ्य: 2026 की मुख्य तिथि और दरभंगा तिथि-समय को शहर-विशिष्ट पंचांग references से cross-check किया गया।

क्षेत्रीय परंपरा: मिथिला-संबंधित स्रोतों और सांस्कृतिक विवरणों से नहाय-खाय, निर्जला व्रत, पारण, भोजन और लोककथा संबंधी सामग्री की तुलना की गई।

Editorial rule: जहां स्रोतों में क्षेत्रीय अंतर है, वहां ShivMarg उसे “परंपरा/क्षेत्रीय रूप” के रूप में बताता है, सार्वदेशिक नियम के रूप में नहीं।

Last verified: 8 सितंबर 2026.

महत्वपूर्ण: पंचांग समय को दरभंगा/मिथिला संदर्भ के रूप में प्रस्तुत किया गया है; दूसरे शहरों के लिए स्थानीय पंचांग देखना आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जितिया 2026 में कब है?

मुख्य जितिया/जीवित्पुत्रिका व्रत शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को है। नहाय-खाय 2 अक्टूबर और पारण 4 अक्टूबर की सुबह होगा।

जितिया की अष्टमी तिथि कब है?

दरभंगा संदर्भ में अष्टमी 3 अक्टूबर 2026 को 07:59 बजे शुरू और 4 अक्टूबर को 05:51 बजे समाप्त होती है। शहर के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है।

जितिया का पारण कब करें?

4 अक्टूबर 2026 की सुबह स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण करें। अष्टमी समाप्ति और स्थानीय सूर्योदय को ध्यान में रखें। दूसरे शहर का समय अपने शहर पर लागू न करें।

जितिया के तीन दिन कौन-कौन से हैं?

पहला नहाय-खाय, दूसरा मुख्य खर/जितिया निर्जला व्रत और तीसरा पारण। 2026 में क्रमशः 2, 3 और 4 अक्टूबर हैं।

क्या जितिया केवल बेटों के लिए है?

पुरानी परंपराओं में पुत्र की दीर्घायु का उल्लेख मिलता है। आज अनेक परिवार सभी संतानों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और दीर्घायु के लिए व्रत और प्रार्थना करते हैं।

जितिया में क्या खाना चाहिए?

नहाय-खाय का भोजन क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदलता है। मिथिला में मड़ुआ/मरुआ की रोटी और स्थानीय सब्जियों का उल्लेख मिलता है; कुछ समुदायों में मछली-भात की परंपरा भी है। इसे सभी परिवारों के लिए अनिवार्य न मानें।

जितिया की मुख्य कथा क्या है?

जीमूतवाहन और नाग-पुत्र शंखचूड़ की कथा प्रमुख है। कई समुदायों में चील और सियारिन की लोककथा भी सुनाई जाती है।

क्या पुरुष जितिया व्रत रख सकते हैं?

परंपरागत रूप से यह माताओं से जुड़ा व्रत है, लेकिन संतान के कल्याण की प्रार्थना किसी एक लिंग तक सीमित नहीं है। औपचारिक व्रत-विधि के लिए परिवार या समुदाय की परंपरा का पालन करें।